मंगलवार

भैय्या जी स्माइल ...

जय हो

आजकल भाई जी के गृह नक्षत्र पर शनि की वक्र दृष्टि है इस कारण से भाई जी जिस काम को हाथ में लेते हैं उसमे तीन तेरह हो जाता है ... अब देखिये ने भाई जी ने गाँधी मैदान में अपने दोस्त के बुलावे पर जैसे ही कदम रखा की सुर के बदले संग्राम छिड़ गया ... भाई जी खाली मंच से बाईट ही देते रह गए और कबाड़ा हो गया ... बेचारे बनारस वाले तिवारी जी का बोलेंगे ... असल में बनारस वाले तिवारी जी तो इस लिए बुला लिए कि कुछ भी हो भाई जी जैसा गरम दिल वाला भैया नहीं मिलेगा ... सो गाँधी मैदान में जब दोनों मिले तो फोटोग्राफर ने कहा ... भैया जी स्माइल ...|और भाई जी का स्माइल ऐसा कि रुलाई बढ़ा दिया तिवारी का... ऐसा बंटाधार किया कि बेचारे तिवारी ... सोच रहे हैं कि दोस्त के कारण हुआ कि खरमास वाले विद्रोही नाम वाले पत्रकार की वजह से |

अब देखिये ना बेचारे विद्रोही नाम वाले का... का दोष ... खरमास और मलमास नहीं मानते ... मत मानिए ... लेकिन बेचारे मुत्तु का जो किये सो ठीक नहीं किये ... पानी पी पी के हचक हचक के रोया बेचारा ... हो गया ना ... इधर जोइनिंग और उधर ... कुर्सी तोड़ हंगामा ... ले बलैया ... कुर्सी ही नहीं टावर को भी चितंग कर दिया ... तिवारी जी खरुवा गए ... अब पंडित को बनारस से बुलवा लिए हैं कि भैया जी का दोष कि विद्रोही टाइप पत्रकार का ... जांचेंगे ... मुत्तु भैया ना हंस रहा है और ना गा रहा है ... खाली अपनी वो वाली अंगुली को चुपचाप निहार रहे हैं ... सा.... पासो लिया और जोवाइनो कर लिया ... देखेंगे ... |

सो अब कथा में रोचक घुमाव ... भैया जी अगले ही दिन प्लेन पकड़ लिए ... और तिवारी की तरफ ना मुड़ने का संकल्प भी लिए है पर तिवारी का अगला दाव भाई जी के लिए कड़ा है ... चैनलवा का दाम पूछ रहा है ... कितना में ... आदमी नहीं खाली सामान का दाम... भाई जी की फट रही है ....ड़ |

असल में भाईजी की समस्या चैनल की कीमत नहीं बल्कि इस चैनल के लिए बाज़ार से उठाया गया पैसा है जिसे वे अभी तक चुका नहीं पायें हैं ! ऐसे में तिवारी के सवाल का जवाब कैसे दें पर छोटा तिवारी अड़ गया है ... चाचा चैनलवा दे दीजिये ... हमरे वाला प्रोग्राम दिखा रहे है ... हम तो नया प्रोग्राम बजरंग वाली दिखायेंगे !

तो इसीलिए तिवारी ने कहा ... हे भैया ... सुर लगाये हम ... संग्राम देखें भाई जी ! जय हो

दरबारे आम हो ... या... पिए 8 पी एम

जय हो

भाई जी की जय हो ... कितना बढ़िया बनाये प्रोग्राम ... झकास ... सीएम को भले ही जनता जनार्दन ने दिया हो जनादेश ... पर आपने तो दावा कर दिया ... दिखाएँगे महफिले सीएम ... दिखाए कहाँ ... दोस्ती का इससे अच्छा पैगाम क्या होगा ... महफिले सी एम ... सी एम यानि मुख्यमंत्री का महफ़िल ... चकाचौंध रौशनी ... छलकते जाम ... घुंघरू की खनखनाहट ... गजरे की महक ... कहाँ दिखाए ...हिम्मत करिए और ... सच दिखने का माद्दा रखिये ... झूठ का प्रोमो क्यों दिखा रहें हैं ... टीटीएम फेल क्या हुआ लग गए ... सच जय हो |

यह मानता हूँ की कुमार के चक्कर में फक्कर बनाने की तैयारी में हैं ... तो बनिए ना ... पर गलत प्रोमो से जनता को आपकी असलियत का पता चलता है ... क्या हुआ जो... सी एम ने आपके राजनितिक सम्पादक को चोपर से उतार दिया ... जीत के बाद आपके चैनल से टिक टैक नहीं किया ... आप ... रह गए कुमार के फेर में ... अब यह झूठ क्यों की पहले के कुमार को सी एम के कहने पर आप ने हटाया ... सी एम को पता भी नहीं है |

ऐट पी एम में अपनी कहानी क्यों नहीं दिखाते ... मैडम आयी ...मिली ... फिर भी ऐठन क्यों ...अपने को संभाल कर रखिये ... आप पर भी नज़र है ... चैनल के लोंगो को पता है की अब आप यहाँ भी फेल हो गए है और चैनल को बनियागीरी पर उतारने की फ़िराक में हैं ...इसीलिए ... गलत स्लोगन के साथ प्रोमो से मैसेज गलत जाता है ... दरबार में वापसी के आपके सारे तिकड़म अब चलने वाला नहीं है ...|

आपके चैनल के लोंगो ने तो कहना शुरू कर दिया है चैनल बिक रहा है ... लोग बहार में दुग्दुग्गी ना बजा दे ... बचिए ... इस कुमार को बताइए कि रे भाई ... इ बिहार है ... तुरते ... फट जाएगा ... इसलिए ठेपी अभिये लगा लो ... कही गृह लग गया ना ... ऐट पीएम भी नहीं मिलेगा ...देसी से ही काम चलाना होगा !धमकी नहीं ... सजेसन है |

जय हो

गुरुवार

मीडिया की लक्षमण रेखा

जय हो

बिहार के पत्रकार नितीश कुमार के सत्ता में वापसी को अपनी जीत मानते हैं ! क्या किसी एक दल के प्रति पत्रकारों का यह समर्पण लोकतंत्र को शोभा देता है ? सवाल पहले इसलिए खडा कर रहा हूँ ताकि आपको यह समझ में आ जाये की पत्रकारिता ... बिना किसी विशेषाधिकार के लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ माना गया तो पारदर्शिता की वजह से ! लोकतंत्र के समर्थको ने यह मान लिया था की पत्रकार इमानदारी का पट्टा लगाकर आयेंगे और ना काहू से दोस्ती और ना काहू से बैर की परम्परा को आगे बढ़ाएंगे ! पर सुबिधा भीगी समाज में डाक्टर और वकील की तरह फीस वसूलने वाले चौथे स्तम्भ समाज के कारिंदे इस तरह अपने इरादों को घायल करा लेंगे किसी को उम्मीद नहीं थी !
नितीश कुमार की सत्ता वापसी की घटना को बिहार जैसे पिछड़े राज्यों में जनता की मनोदशा को दर्शाती है ... वोटर के सचेत होने और उन्हें जिज्ञासु होने की पहचान कराती है पर इसको लेकर गुणगान ठीक नहीं है !इससे तानाशाही प्रवृति को बल मिलता है ! इसी लिए सचेत अब पत्रकारों को होना है ... जनता को नहीं !
आज की तारीख में यह खबर किसी अखबार या टीवी पर मैंने नहीं देखा की न्यायपालिका का एक सदस्य के साथ नितीश कुमार के इसी राज्य में घटना हुई ... लूटपाट करने वालो ने नितीश कुमार के इलाके में गाडी रोक कर घटना को अंजाम दिया ... घायल होकर जुडिशियल मजिस्ट्रेट पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती हैं और खबर से पत्रकार दूर हैं ! धन्य हैं बिहार के पत्रकार कि नितीश कुमार की जीत के जश्न में इतना डूबे हैं कि खबर से ही दूर हो गए !
नितीश कुमार जीते या लालू यादव ! हमें तो सिर्फ अन्धो के शहर में आइना बेचना है ! अपने फायदे के लिए सत्ता के सामने सरेंडर का नतीजा इसी पटना के पत्रकार देख चुके है ! लालू यादव ने कितने पत्रकारों के घरवाली को मास्टरनी बना दिया ... सरकार और विधान सभा में नौकरी दे दिया ... लेकिन जब लालू यादव तानाशाही पर उतरे तो पत्रकार खिलाफ नहीं लिख पाए !
रेखा सामने है ... इसे आप तय करें कि यह लक्षमण रेखा है या ...?

जय हो

सोमवार

एक तरफ शपथ ग्रहण दूसरी तरफ माँ बहन

जय हो

यह शर्मशार करने वाली घटना पटना के गाँधी मैदान की है ... भैया चौबीस घंटे चलने वाले एक चैनल में कैमरा मैन हैं और झाजी रेपोटर से नाराज़ चल रहें है ... असल में भैया कैमरा मैन का घाव झाजी रिपोटर से पुराना है सो खार का बदला लेने का प्रोग्राम तत्काल गांधी मैदान में बना लिए और मंत्री के शपथ ग्रहण के समय ही भैया ने झाजी जो एक लोकल चैनल के ब्यूरो हेड को मा बहन कर दिया ... अब भैया झाजी पंडित तो थे नहीं सीधे एगो बल्ला उठा लिए और लगे खानदान को गरियाने ... शपथ ग्रहण देखने आये नेता दंग ... अरे इ का हुआ हो ... पर दोनों ने एक दुसरे का पता बता कर देख लेने की धमकी देना शुरू किया ... उ तो भला हो अंग्रेजी वाले झाजी का की एक दुसरे को रोका नहीं तो एक अलगे मज़ा मिलता !


रविवार

दिल की बात ... यानी ताबड़ तोड़ तेल मालिश

जय हो भाई साहेब अब समझ गए की टी टी एम के बिना कुछ नहीं हो सकता सो आजकल अपने चैनल पर एक प्रोग्राम दिखा रहे हैं ... \'दिल की बात दिमाग से\'... खुद एंकर भी हैं और दिल भी उनका ही है !एकदम नेशनल चैनल की प्रभु चावला ... रजत शर्मा ... विनोद दुआ की तर्ज पर ! चैनल पर प्रोमो चला तो लगा की भाई साहेब अपनी जुबानी अपनी गाथा सुनायेंगे ... फ़िल्मी बतिया बतियाएंगे पर जब प्रोग्राम आया तो है रे बप्पा एकदमे टी टी एम ... ताबड़तोड़ तेल मालिश ... वो भी खालिश कडुवा तेल से !अब बेचारे शेखर सुमन झाजीगिरी में फंस गए ! क्या करते अपने हिसाब से शेखर बचते रहे ... पर भाई साहेब सरसों तेल में विटामिन की गोली डाल कर मसजियाते रहे !असल में भाई साहेब को अब चिंता सता रही है ... करोडो रुपया खर्च के बाद भी सांसद नहीं बन पाए ... सोनिया के नाम पर फिल्म बेचकर राज्य सभा जाने का मामला भी फिस्स हो गया ... ले देकर अब एक ही रास्ता है ... सुशासन बाबू का चरण सो भाई साहेब चरण बंदना कार्यक्रम के लिए एक प्रोग्राम ही बना दिए !हैं ना मजेदार टी टी एम !

वैसे आपको बता दूं की भाई साहेब एक्के तीर से दू गो शिकार करने चले थे ... क्या करिएगा तीरवे भोथर था... टारगेट पर पहुँचने के पहले ही धराम से गिर गया !नकली माल से सुशाशन बाबू टी टी एम नहीं कराते है सो भाई साहेब को पता नहीं था ... मानना परेगा कभी जिगड़ी दोस्त का दावा करने वाले भाई साहेब अब टी टी एम मंत्र में महारत होना चाहते है !असल में भाई साहेब सठिया गए हैं यही कारण है की आलतू फालतू में लगे रहते हैं !

असल में भाई साहेब की समस्या गंभीर है !बिहार में कई गो प्रोजेक्ट लेकर आये ... सबके सब टांय टांय फिस्स !सुगर फैक्ट्री... बंद ...मॉल तैयार नहीं ... ठेकेदारी ठेंगे पर ... का करेंगे !

तो सायबान , भाई साहेब अब खुदे बचे प्रोजेक्ट का तेल निकालेंगे और टी टी एम का नया प्रोजेक्ट पुरे सत्ता के गलियारे में लगायेंगे ! तो भाई साहेब की...

जय हो

मौर्या टीवी का हो गया बंटाधार

जय हो

यह मान लीजिये कि मौर्या टीवी का अब बंटाधार होना तय हो गया है ! मुकेश कुमार के इस्तीफ़ा के बाद चैनल के मालिक प्रकाश झा ने चैनल को फिर से एक नया हेड देने की तैयारी में पटना में विराजमान हैं और इस बार फिर एक पिटे हुए मोहरे के जिम्मे चैनल को देने जा रहे है ! आपको मालूम हो कि ये वही कुमार राजेश है जिन्होंने रजत शर्मा के साथ आज की बात से कैरियर की शुरुवात के बाद आजतक में गए और आज तक कहीं स्थिर नहीं हो पाए ! दूरदर्शन ... इंडिया टीवी के बाद हर दरवाजे असफलता का मुहर पीठ पर चस्पा कराने के बाद आज कुमार राजेश फिल्मकार प्रकश झा की मौर्या टीवी को बैतरणी पार कराने का ठेका लेने पटना आ गए है !और आज प्रकाश झा एक बार और मौर्या टीवी को दाऊ पर लगाने जा रहें हैं !

आपको बताते चले कि मौर्या टीवी की स्थिति आज भी अच्छी नहीं है ! प्रतिमाह लाखो का खर्च कर प्रकाश झा इसे बिहार में स्थापित करने की जद्दोजहद कर रहें हैं पर यह एक ऐसा नाव है जिसे लंगर उठाये बिना ही लगातार पतवार चलाने का जोखिम प्रकाश झा जैसे बुद्धिमान उठा रहे हैं !

आपको यह जान कर हैरानी होगी कि कुमार राजेश भी उसी गैंग के सदस्य हैं जिसका सरदार यशवंत देशमुख रहा है ! पहले तो चुनावी विश्लेष्ण के नाम पर यशवंत ने प्रकाश झा को तगड़ा झटका दिया और जमकर पैसे भी वसूले और जब मुकेश कुमार जैसे गैंगस्टर ने विदाई ली तो कुमार राजेश जैसे सदस्य के जिम्मे चैनल को थम्हा दिया ! अब भला हो प्रकाश झा का जो जानकार भी अनजान बने हुए है ! उनको यह पता है कि उनके चैनल का स्तर तो मुकेश ने इस कदर खराब कर दिया कि राजनितिक दल के लोग पैसा देकर मनमाफिक खबर भी चलवा लेते रहे ! और कई डालो ने तो इस चैनल को खबर देने से भी मन कर दिया है !

कुमार राजेश के आने की भनक ने तो मौर्या टीवी कर्मियों को हिला दिया है ... अब उन्हें लगता है कि इस चैनल को बर्बाद होने से खुद प्रकाश झा भी नहीं रोक सकते सो कईयों ने अब बोरिया बिस्तर बांधना शुरू कर दिया है ! असल में कर्मियों को लगता है कि बाहर से हेड लाकर लाखो रूपये महीना तो प्रकाश झा खर्च कर सकते है पर पांच हज़ार में काम कर रहे पत्रकारों की सैलरी नहीं बढ़ा सकते !

एक कहावत सही है कि बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होई ! मौर्या टीवी के साथ यही है ... लायेंगे धन्धेवाज तो खबर कहाँ से होई ! जय हो

बुधवार

विचित्र शहर के टीवी चैनल में अब बनेगा प्रिगनेंसी रूम

जय हो

यह वही विचित्र शहर है जहाँ सब कुछ अपने हिसाब से चलता है |कोई कुछ भी करे ... कुछ भी तो आप उसे रोकने की हिमाकत मत कीजिये ... फंस जाइयेगा ... वंजर खेत में जान जोखिम में चला जाएगा ... लेकिन वेकिन नहीं ... अपने को सम्हाल के रखना पडेगा ... समझे ...जो कुछ पहले विचित्र देश के बड़े शहरों में होता था अब इस विचित्र शहर में होता है |आप पूछेंगे कि की बात बनौवल से क्या मतलब ... कहानी बताइये ... तो जनाब ... कहानी नहीं यह एक हकीकत है जिसे आप नाक बंद कर कबुलिये या गटकिये ... झेलना तो पडेगा |

हाँ, तो मई आपको एक कहानी बता रहा था ... बिलकुल तोता मैना की कहानी ... जैसे दादी बचपन में सुनाती रही है ... पर दादी की कहानी और इस कहानी में फर्क यह है कि दादी की कहानी में एक अर्थ था और इस कहानी में सत्य है !जैसा कि आप जानते हैं कि विचित्र शहर में सब कुछ है नहीं है तो तमीज़ और यह यहाँ आप किसी को बताइये नहीं | लगता है कि फिर भटक रहा हूँ तो सीधे कहानी ...| तो विचित्र शहर के इस थोड़े से पुराने और टी आर पी में उतार चढ़ाव वाले चैनल से जब स्यंभू सम्पादक ने विदा ली और एक ब्लॉग पर अपनी विदाई की कहानी सूना रहे थे तो उसी समय उसी चैनल में एक अफवाह उडी की भाई अब इस चैनल में काम करने वालो को और आज़ादी मिलने वाली है ... आज़ादी यह कि चैनल वालों ने यह फैसला किया है कि चैनल के अन्दर काम करने वालियों की चाहत को देखते हुए एक ऐसा कमरा बनाया जाएगा जहाँ प्रिगनेंसी और अबोर्सन कराया जाएगा ! इसके लिए अब किसी को छुट्टी नहीं दी जायेगी |खबर फैलते देर नहीं लगी और जब खबर उन तक पहुंची तो उनकी आँखों में आंसू आ गए ... कितना बढ़िया मालिक है ... काम करने वालो की हर चाहत पर ध्यान दिया जाता है | पर कई दुसरे कर्मी चौंक गए कि भाई इस फैसले की वजह ... लोग एक दुसरे से पूछने की हिम्मत भले ही नहीं जुटा पाए पर उनकी आँखों की घूमती पुतली इस बात की ताकीद कर रही थी |अब शुरू हुआ वेबजह की जांच पड़ताल ... ले भाई मामला खुल गया ...|

तो जनाब जिसको इस चैनल में पण्डेवा एंकर बना कर लाया था ... बेचारी प्रेम फांस में फंस कर ... चैनल के एक सहयोगी को सब कुछ सौंप दी ! पता चला कि दिल लेने वाले साहब धोखा देकर भागने वाले सम्पादक का करीबी है और एंकर में ज्यादे मौक़ा दिलाने के नाम पर सब कुछ लूट लिया और बेचारी एंकर एक महीने के बिना सैलरी पर घर में छुट्टी लेकर आराम कर रही है क्योंकि उसके अन्दर नीना गुप्ता बनने का माद्दा नहीं था !

इस बात की जानकारी कुछ को ही थी वो भी ... विचित्र शहर के एक पांच सितारा होटल में उल्टी आने के बाद ... मामला समझ में आया बेचारी एंकर को ... क्या करती फायदे के चक्कर में सब कुछ लूटा दिया |पर जिस दिन से चैनल कैम्पस में सारी मेडिकल फैस्लिटी मिलने की बात का ऐलान हुआ है अब तो लाइन लगा दिया है सबने ! कोई मेकप रूम को इस्तेमाल कर रहा है तो कोई गंगा किनारे के फ्लैट का सहारा ले रहा है !मस्ती है भाई ... ऐसी मस्ती और कहाँ |

तो जनाब , आपको भी ऐसी कोई नौकरी की तलाश हो तो सीधे विचित्र शहर के पांडेवा के पास पहुँचिये और लाइन में लग जाइए |

जय हो

शनिवार

नेहा पाण्डेय की क्यों हुई आर्यन टीवी से विदाई


आर्यन टीवी के तेज़ तर्रार एंकर नेहा पाण्डेय को चैनल से छुट्टी कर दी गयी है |कारणों का अभी खुलासा नहीं हुआ है पर जो भीतरी जान्कर्री है उसके मुताबिक नेहा लाइव एंकरिंग के समय जम्हाई लेने के साथ ही बालो को संवार रही थी और इसको चैनल के हेड संजय मिश्र ने गंभीरता से लिया !

जानकारी के मुताबिक जब नेहा को बचाने को सर्वेश आगे आये तो उन्हें भी सचेत किया गया और नेहा को बिदा कर दिया गया !गौरतलब है की नेहा पहले साधना चैनल में रिपोटर थी और अचानक हमार में जाते ही विशेष संबाददाता बना दी गयी और जब सर्वेश ने हमार को अलविदा कहा तो नेहा भी सर्वेश के साथ विदा हो गयी और फिर आर्यन के शुभारम्भ के साथ ही नेहा एक अच्छी पोजीशन पर आर्यन टीवी में अवतरित हुई और इसके पीछे भी सर्वेश की विशेष कृपा माना गया |और अब नेहा की विदाई के साथ ही सर्वेश के भविष्य पर काले बदल के गहराने की बात कही जा रही है

गुरुवार

आखिरकार निपट ही गया मुकेश कुमार से मौर्या

मौर्या टीवी में आज उत्साह का माहौल है | यह ख़ुशी दीवाली की नहीं उससे से भी बड़ी है ! आज मुकेश कुमार से मौर्या टीवी ने अपना पिंड छुडा लिया !पिछले दो महीनो से इस्तीफ़ा की धमकी देकर ब्लैकमेल करने वाले मुकेश लगातार मौर्या टीवी को धोखा दे रहा था ! हकीकत तो यह थी कि मुकेश ने दिल्ली से शुरू होने वाले एक हिंदी चैनल को पहले ही ज्वाइन कर लिया था और दोनों जगह से सैलरी ले रहा था और पिछले दिनों बीबी की बिमारी का बहाना बना कर दिल्ली में नए चैनल की पार्टी में शरीक हुआ था ! मामला खुल जाने के बाद मुकेश दिल्ली से पटना तो पहुंचा पर सिर्फ इस्तीफ़ा देने ! और सोमवार को उसने इस्तीफा सौंप दिया जिसे प्रबंधन ने स्वीकार कर लिया !

आपको बताते चले कि मुकेश की विदाई के बाद अब सुनील पाण्डेय और ऋषि के साथ प्रेम कुमार चिंतित है और यह माना जा रहा है कि इनकी भी विदाई होगी क्योंकि चैनल के ओवी में शराब पीकर उल्टी करने वाले धीरेन्द्र को नोटिस मिल गया है और सुनील पाण्डेय को भी इस कारण विदाई कराने की तैयारी है |


बुधवार

www.hamarivani.com

मंगलवार

अच्छा हुआ रुक गया एअरपोर्ट का तमाशा

जय हो
आपको बता दूं कि पटना के मीडिया वालो का खेल बिगड़ गया है ! रोज़ एयर पोर्ट पर नेताओं की पिछलग्गू बनने की प्रवृति पर सरकार ने रोक लगा दिया है ! अब कहाँ करेंगे ये मिडिया वाले चमचागिरी इसकी सोच में पड़ गए हैं ! सच जानिये तो एअरपोर्ट पर रिपोर्टिंग कम और नज़र मिलान का कार्यक्रम जोड़ पकड़ लिया था !अब इतनी नीचे की सोच वाले हैं पटना के टीवी वाले यह यहाँ काम करने आने वाली लडकियां नहीं समझ पायीं थी ! एअरपोर्ट पर लडकी देखी की जीभ से सिसकियाँ निकालने का दौरा आ जाता था ! क्या नया क्या पुराना ! सब के सब की आँखें तन जाती और आँखों से ही सब करने के लिए किनारा करते इन पत्रकारों को देखते तो आपको शर्म आ जाती पर ये तो निर्लज्जता से बखान करते कि उसकी .... तो देखो ... उ भी देखो ... क्या मस्त है ... तबतक नए लडको में से कोई मोबाइल भी लगा देता ... हेल्यु ... वहाँ क्या कर रही हो ... इधर तो आओ ... ल और खेल शुरू !
छुटभैया नेता भी इस खेल में रस तलाशने लग गया और खबर देने के बहाने मोबाइल नंबर मांग आया और उनको दे दिया जो भेड़ की खाल में भेडियें हैं ... जीह से लाड टपकाते नंबर पाते ही जुगाड़ में लग जाते कि टाइम मिले तो बात तो शुरू कर लूं ! और यह सब सुबह सबेरे ही होने लगता ! और उस दिन तो गजब हो गया ... नज़र मिलाने के चक्कर में पत्रकार नेता को ही भूल गए ! कोई सवाल पूछने वाला नहीं ... नेता खड़े रह गए माइक लगा रह गया और पत्रकार गायब !
खबर सरकार से लेकर एअरपोर्ट अथोरिटी तक गयी और तय हुआ कि सुरक्षा के नाम पर इन पत्रकारों को एअरपोर्ट रिपोर्टिंग बंद करा दिया जाय और जनाब एअरपोर्ट अब सिर्फ नेताओं के लिए .... आपको जाना है तो क्षेत्र में जाइए ! मिला ना मज़ा ! जय हो

शनिवार

टीवी वालो प्लीज़ अब मत डराओ


जय हो 
आपको पहले ही चेता रहा हूँ ... सम्हल कर टीवी देखिये ... आगे पीछे के चक्कर में ये टीवी वाले हमें एकबार फिर भूत प्रेत ... सांप बिच्छु से भयभीत कराने के खेल रच रहे है ... आपको याद दिला दूं के दो दिन पहले देश के नंबर वन का दावा करने वाले आजतक ने दो घंटो तक ऐसे डराया कि कईयों ने तो टीवी बंद कर लिया वहीँ अपने को स्टार कहने वाले ग्रुप का खेल देखिये कि ये तो भूत पर उतार गया !अब इस खेल का हम कर रहें है खुलासा कि आखिर ये टीवी वाले का सांप बिच्छू और भूत प्रेम क्यों जाग गया है !
अयोध्या फैसले के दिन आजतक चैनल के हिस्से आई बंपर टीआरपी से फूलकर कुप्पा हुई आजतक की टीम ने यह प्रोमोशन शुरू किया कि –“ख़बर मतलब आजतक30 सितम्बर को अयोध्या पर आया फ़ैसला और उस दिन आजतक को सबसे ज़्यादा लोंगो ने देखा। उससे कहीं पीछे स्टार न्यूज़ और इंडिया टीवी क्रमशः दूसरे और तीसरे नंबर पर आए। आजतक की टीआरपी ने उस दिन इतनी उछाल भरी कि पुरे हफ्ते का ग्राफ़ केवल एक दिन में   ऊपर उछल आया।आजतक वालो ने फिर दावे करने शुरू किया कि आगे भी ख़बरे ही दिखाएगा। कम से कम आजतक के धांसू प्रोमोशन से तो ऐसा ही लग रहा था।
अभी दो ही दिन हुए थे कि एकाएक आजतक के एडिटोरियल टीम को अक़ल (?) आई और सोचा कि एक दिन के भरोसे तो गाड़ी को स्पीड मिल गई.. लेकिन अयोध्या बार-बार आने से रहा। कोर्ट के फ़ैसले के बाद दो-तीन दिन खींचतानकर अयोध्या पर ही चैनल ने बहस दिखाई थी। लेकिन लोगों की रुचि कहां अयोध्या पर टिकी रहनी थी सो टीम के सामने चुनौती थी कि टीआरपी ऊंची कैसे  बनी रहे। वरना फिर लेने के देने पड़ जाएंगे। और एक शॉर्टकट फ़ार्म्यूलाखोजने के पीछे अपने सैकड़ों रिपोर्टर को लगा दिया | पर यह भी सोचना आजतक के नकवी के लिए भारी पर गया कि पुराने मॉडल के रिपोटर  रूपी तोप के भरोसे टीआरपी ऊंची बनाए रखनी मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। लिहाज़ा तय हुआ कि सभी भूत-प्रेत-नाग-नागिन और चुड़ैले एक साथ बाहर निकाल ली जाएँ। जिन हथियारों के दम पर इंडिया टीवी ने टीआरपी के किले में सेंध लगाकर अगड़े चैनलों में घमासान मचाया था। वही हथियार अब आजतक ने हथिया लिए |

कम से कम इन तस्वीरों से तो दर्शकों को यह तय करना है कि ख़बर का मतलब आजतक होता है या आजतक माने अंधविश्वास। गुरूवार (7 अक्टूबर) को चैनल ने प्राइम टाइम में लगातार डेढ़ घंटे तक सांप-संपेरों का खेल खेला। हरियाणा के हिसार गांव के एक ऐसे व्यक्ति को स्टोरी बनाया गया जिस पर यह पागलपन सवार था कि सांप उसे काटने आते हैं। चैनल ने स्टूडियो में पंडित-मनोवैज्ञानिक और डॉक्टर तक बुलाए । पीपली लाइव के मानिंद सांप-सपेरा लाइव बिठाए गए। उधर गांव में रिपोर्टर ने पहुंचकर पूरा मजमा सजाया और चौपाल भी बैठी। कल तक जो खबर मतलब आजतक बताया जा रहा था। वहां सांप महाराज संपेरे की पुंगी पर नाच रहे थे। सांप एक विक्षिप्त देहाती को डस रहा था तो चैनल के एंकर स्टूडियो में बैठे विशेषज्ञों को डस रहे थे। वे सब मिलकर हम दर्शकों को डसते रहे। अयोध्या के बाद आजतक के लिए यह राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका था। 

एक वक़्त था जब इंडिया टीवी के माथे यह ठीकरा फोड़ा जाता था कि रजत शर्मा का यह चैनल केवल नाग-नागिन, एलियन्स और भूतप्रेत के दम पर टीआरपी बंटोरता है। पर इंडिया टीवी के शुरमाओ ने अपनी बीमारी आजतक को ट्रांसफर कर दिया । उधर, इंडिया टीवी तो फटाफट खबरों में मस्त है। दो साल हुए इस चैनल में अब ना तो कोई भूत आता है और ना ही नाग। अलबत्ता अपमार्केट भूत और एलियन्स स्टार न्यूज़ पर इन दिनों जमकर दर्शन दे रहे हैं। 

तो  भाइयो टीवी के भूत को झारू से झाड कर ठीक करने का माद्दा आपही दर्शको के पास है ! तो एक बार झाड दीजिये और फिर कहिये ...


जय हो





शुक्रवार

घुंघरू के बोल

जय हो
बॉस आजकल मुश्किल में आ गए हैं !करना कुछ चाहते है पर हो कुछ और जाता है ! अब देखिये ना राजा ने पत्रकारों को बुलवाया और चुनाव प्रचार के अपने फैसले को बताना शुरू किया ! राजा की खूबी है आते ही पारखी निगाह चारो तरफ ... बॉस पर भी नज़र गयी ... बॉस मुस्कुरा दिया ... पर राजा की आँखों को बॉस के कुटिल मुस्कान के भीतर का फरेब दिख गया बस राजा ने तय कर लिया... बजाउंगा ... ऐसा बजाउंगा की बजना छोड़ देगा !हुआ भी वही !
राजा ने सवाल जवाब का दौर शुरू किया ... राजा का उत्तर एक बार जा रहा हूँ तो पहले चरण का प्रचार करिए को आउंगा ... जी ... जी ...जी एक सवाल है ... बॉस की आवाज़ गूंजती रही और राजा ने इग्नोर कर दिया ... एक सवाल है ... राजा जी ... पुराने दलपति ने कहा है कि मेरे पैरों में घुंघरू बन्हा दे तो फिर मेरी चाल देख ले ... राजा कि नज़रे ... तिरछी नज़रे उठी निशाने पर बॉस ... राजा कि आवाज़ या उत्तर ... तो आप नाच लीजिये ... ठहाका गुंजा ... राजा मुस्कुराए ... कैसा बजा बॉस ... अच्छा लगा ना
जय हो

गुरुवार

साइज़ क्या है

जय हो
जब आप शर्मिंदगी को भूल जाएँ और निर्लज्जता पर उतर आयें तो आप कुछ भी कर सकते हैं ... कुछ भी ... भले ही यह आपको शोभा दे या नहीं ! आप पत्रकार हैं इसका मतलब ... दलाल नहीं ना ... कि मान बैठे अपने को भडूवा... ! आप चैनल के मालिक हो सकते हैं ... पत्रकारिता के शिखर पर जाएँ ... पर यह नहीं करें ... !

आज की दौर में कोई भी मीडिया की पढ़ाई करता या करती है तो उसके सामने एक सपना होता है ... अखवार में छपने या फिर टीवी पर दिखने का ! लेकिन आप जैसे लोग जब उससे साइज़ और सोते हुए कपडे का कलर पूछेंगे तो क्या बीतेगी उस पर इसका अंदाजा है ! गलतियां एक बार होती है तो उसे माफ़ किया जाता है पर बार बार होने पर बलंडर कहा जाता है ... बाज़ार में पता कर के देखिये क्या इमेज बन गया है ... दलाली तक तो ठीक है पर दूसरों के लिए दल्ला बनाना ठीक नहीं है !
जय हो 

चोर पुलिस


जय हो



यह तो सच है कि पुलिस को देखते ही कितना बड़ा चोर क्यों नहीं हो उसका फट जाता है ! हुआ भी वही पुलिस जैसे ही चैनल के दरवाज़े पहुंची चोरो ने अपना जुर्म कबूल कर लिया ! यह बता दिया है कि भारत का पूर्व नाम को तोड़ मरोर कर नया नाम पर पटना से खुलने वाले एक चैनल को सारा सोफ्टवेयर बेच दिया है ! इस काम में कई शामिल थे पर चैनल वालो ने दो अनुराग मिश्र और रंजन को ही निकाला वैसे एक धीरज तो पहले से ही भाग कर उस चैनल में काम कर रहा है ! अब सवाल है कि बिहार में एक कहावत पहले से ही हीट ही नहीं फिट भी है ... चोर चोरी से जाय हेरा फेरी से ना जाय ! तो बंधू ,हेरा फेरी कर सोफ्टवेयर पाने वाले चैनल की दशा कितने दिनों की है यह तो सभी जानते है ... क्योंकि इस नए चैनल के नबर दो सर की करामात जाननी हो तो यहाँ नौकरी के लिए इंटरवियू देने आयी को जनाव ने ऐसा न्यूज़ पैक दिया की वह भाग खड़ी हुई ! जनाब ने उसे तरक्की पाने से लेकर नौकरी पाने का जुगाड़ बता दिया और .... मांग लिया ! लोंगो को टीवी पर देखने वाली इस नयी नवेली ने पत्रकारों का इस घिनौने चेहरे को देखा तो सन्न रह गयी ! इस पेशे से ही नफरत कर बैठी ... सब कुछ लुटा दिया ... यह नहीं गाना चाहती थी !

आप कभी फेस बुक पर इस चैनल के एक एंकर को तलाश करिए और इस चैनल के भीतर कैसे फोटो शूट होते है ... मॉडलिंग की ट्रेनिंग मिलती है का खुलासा हो जाएगा !

बहरहाल , चैनल चलाने के लिए यह जरुरी है क्या कि आपको ... आपके साथ मैडम हो ... और हमेशा आप गायें ... मिलाने को जी चाहता है


जय हो

खूब मिलेगा काजू किसमिस

जय हो बिहार में चुनावी डंका क्या बजा नेताओं के साथ दौरा करने वाले पत्रकार और छायाकारो ने अपना फटेला बैग और पुराना कैमरा सरियाना शुरू कर दिया है

खबर है कि इस चुनाव में नया बैग के साथ ही दिवाली गिफ्ट के लिए ये जांबाज़ अभी से तैयारी में जुट गए हैं की किस नेता के साथ कौन फिट बैठेगा
मांसाहारी पत्रकार अब इस फेरे में हैं कि किसी तरह पासवान जी का साथ मिले पर उनके यहाँ अभी से लोहा को सोना बनाने वाले छायाकार जी जाजिम तकिया लेकर बैठ गए है कि किसी की इंट्री नहीं
वैसे पासवान जी के साथ चुनावी दौरा करने वाले पत्रकारों कि कमी नहीं है ! क्या बूढ़े और क्या जवान पत्रकार सबके सब ... उसमे भी जब दौरे में दिवाली आनी हो तब ... अपनी नौ फूट वाली जीभ लपलपा रहे सभी ... मछली भात का अभी से गुणगान हो रहा है




पर चुनावी दौरे में यादव जी भी कम नहीं करते हैं भाई ... लिट्टी और चोखा अरे इस बार तो समझ ही रहे हैं ... ऐलानिया हड्डी खाने का प्रबंध ... पहले से ही कतार लगी है ... पत्रकार ... टीवी पत्रकार ... छायाकार ... कैमरा मैन सबका मन लपलपाय हुआ है
यादव जी की खासियत कहिये कि जो भी साथे गया कि अगले ही दिन ... नंबर वन हो जाता है




वैसे नितीश कुमार के साथ जाने वालो की कमी नहीं है पर यंहा लस्सी और फ्रूट पैकेट से काम चलाना पड़ता है
जगह जगह भाषण की रिकार्डिंग और ऊपर से निकलने वाली थेसिस ... विश्लेषण ...
लेकिन पहलवान , कांग्रेस भी खूब ख़याल इन भाई साहेबो का रखता है
समय पर पैकेट ... समय समय पर सड़क छाप नेताओं का शानदार पार्टी भी मिलती रहती है ... ना रहे शाम बांकी ... ना रहे जाम बांकी ... अगले दिन अखवारो में नेताजी का फोटू छप जाता है !वैसे एक बात है कि ऐसे नेताओं के एहसान तले दबने वाले पत्रकारों की कमी नहीं है ... साप्ताहिक से लेकर दैनिक और नेशनल से लेकर रीजनल तक एकाध बिडले ही है जो नहीं बिके... नहीं तो यहाँ हाट लगा है ... आओ भाई आओ ... पांच हज़ार महीने का पत्रकार ... सात हज़ार महीने का ... एक रेट ... मोलतोल नहीं ... ज़िन्दगी भर बंदगी करेगा ... दलाली का चार पुश्तो का अनुभव !



अब आप भी सोच रहे होंगे कि ऐसा ... और ऐसे ही लोगो की लेखनी पर भरोसा ... ना बाबा ना !ख़याल रखिये समाज से आपकी कोई बात छुपती नहीं ... तो दल्ला क्यों ... पेशे के प्रति समर्पण क्यों नहीं




जय हो

समाजवादी धडाम


जय हो

यहाँ अखवारो की अलग दुनिया है !उनकी दुनिया में झांकना मना है ! वे कुछ भी करे ... अखवारो के मालिको के भले के लिए भले ही पत्रकारिता गिरवी पड़ जाय इन्हें इससे कोई मतलब नहीं ! क्या शहर है ... मालिको के लिए विज्ञापन जुटाते इन पत्रकारों को देखेंगे तो ... पत्रकारों के कौम से ही नफरत होने लगेगा ! पर इनके अखवारो में इन्ही पत्रकारों का दुसरा चेहरा साफ़ दिखेगा आपको ! अखवारो की दुनिया में समाजवाद का एक ऐसा चेहरा आपके सामने आयेगा कि बड़े से बड़े समाजवादी धडाम हो जायेंगे ! यानी , हरेक पार्टी और हर नेता से वसूली प्रोग्राम ... नेता का चेहरा छाप कर हो ... शुभकामना सन्देश से लेकर चापलूसी तक ... वसूली प्रोग्राम ! वसूली का हिस्सा भले ही जेब में रह जाए ! अखवारो के इस चरित्र को चैनल वाले भाइयों ने बखूबी अपना लिया ! यहाँ भी अब नेता का शुभकामना सन्देश ... स्क्रोल के लिए ... यहाँ तक की बाईट के लिए भी वसूली अभियान जारी है ! अब देखिये ना देसी दारु के एक ब्रांड के नाम पर चलने वाले चैनल के नए आये मुत्तु जी ने तिकरम भिड़ा दिया है ... मदद के लिए भैय्या जी ... उनका पुराना तिकरम ... सब एकजुट ! इलाके के नेता से लेकर सब ... वसूली करने और कराने के लिए अभी से डेरा डंडा डाल दिया है ! अब संयोग देखिये ... विचित्र शहर के विचित्र न्यूज़ के सम्पादक से यहाँ भी रिश्ता निकल आया ! वसूली का नया रास्ता सम्पादक तलाश रहा है ! पुराने नियम से अब वसूली नहीं करने का प्लान तैयार हो गया है ! अब यहाँ आया फिर अखवार ! मुत्तु भैया के हाथ काफी लम्बे हैं भले ही उनसे भी अधिक भैय्या जी का हाथ है ! विधायक से लेकर सांसद तक के कमरे में सीधे पहुँच है जी ! अब खेल शुरू ... देसी बनकर लूटेगा ... लूटकांड ... कलियुगी लूटकांड !

अखवारो के पन्नो पर मय फोटो छपने वाले नेताओं की सूची तैयार ... श्री कृष्णापुरी का मामला शर्मा जी के हाथ ... टुकड़ा मिलेगा ! अब भैया एकदम मैदान साफ़ है रोकटोक करनेवाला कौन है ... चेहरा दिखाने से पहले रेट लिस्ट ... पैनल वाला ... सीधे ... या बाईट ... अलग रेट ... नो कमीशन ... डाइरेक्ट कान्टेक्ट ! मौक़ा भी है और माहौल भी ! चुनाव में इस बार बैतरनी पार नहीं किया तो ... ? 
जय हो

मंगलवार

आपको माफी नहीं

जय हो


खुलासा का नया फेस हो सकता है कुछ हमारे सज्जन दोस्तों को ठीक नहीं लगे ... पर क्या करिएगा बीस सालो का पाप धोने में थोडा टाइम तो लगेगा ही ... है ना ! आप मोबाइल नंबर पर खबर देने की वजाय माँ बहन की शर्मनाक गाली दीजिएगा ... हम चाहें तो मोबाइल नंबर के साथ उस गाली को यहाँ छाप दें ... मै पहले ही कह चुका हूँ की किसी को शर्मिन्दा करने की हमारी कोई मंशा नहीं है ! फर्क यही है की हम आपको सच्चाई बताना चाहते हैं ! बचपन कहें या छुटपन ... आपकी गलतियों पर जब आपके पिता या बड़े भाई डांटते थे तो आप उनको भी यही गाली देतें होंगे ... मीट झा कोई पत्रकार नहीं हैं ... यह सिर्फ मेरी मानस पटल पर उपजी मेरी कल्पना है जिसे आप भाई अपनी कहानी मान लेते हैं ! मैंने आपसे पहले ही विनम्र निवेदन किया था की मै किसी को अपमानित नहीं करना चाहता ... पर लगा की पटना के पत्रकार बेईमान ही नहीं शर्मनाक स्थिति को जीते है ... कोई काम लेकर आये तो दाम मत बताइये ... आप पत्रकार है अब आपके पास पत्र भी है और पत्र को आकर देने की क्षमता भी है ... आपने गाली दी मैंने पढ़ने के बाद आपको वापस कर दिया ... कैसा लगा ... ? शराब खराब होता तो ये ... संस्कार में नहीं होता... शायद त्रेता के ऋषि कभी इसे नहीं अपनाते और इसका नाम आयुर्वेद नहीं अपनाता
बहरहाल यह कटु है आप इसे नहीं स्वीकार पायेंगे ! क्योंकि आपके अन्दर का रावण उग्र हो चुका है .... आपने कभी सोचा ... देश में निजी न्यूज़ चैनल में पहले दिखाई देने वाले चैनल में आप कैसे आये ... आप अभी पढ़िये ... गुनिये ... और सामना कीजिए!

हाँ तो भाई साहेब ... देश के कभी नबर वन रहे चैनल के नंबर 2 ... आप की असिलियत बता दूं ... कभी सिर नहीं उठा पाइयेगा ... शादी ... लडकी ... कुंवारे ... रानी घाट... जुल्फों की राह में लौटना ... बड़ा ... चलिए ... आपने ही कहानी का खुलासा किया तो गाली क्यों ! अब भडोसा दिलाता हूँ की आपके नंबर के साथ आपकी बात छापूंगा ... माफी मांगने पर रिहाई मिलेगी जनाब ... खुलासा यह कहता है ... की रिपोर्ट गलत है ... तो आप मेल भेजे डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू डोट खुलासा४मीडियाडोटकौम पर ! यह हिदायत नहीं बल्कि आप बड़े भाइयों से निवेदन है ! जय हो

शुक्रवार

मीट झा पुराण

जय हो



भाई साहेब मीट बढ़ियाँ बनाते है ... जाति के हिसाब से खिलाते भी तरीके से है ... खा लिए तो सोने की व्यवस्था भी कर देते है ... लेकिन एक बात इस व्यवस्था में अपना एक पाई नहीं लगाते है ! है ना मीट भात झा की जय हो वाली बात ! तो इस मीट भात वाली कथा सुनाने से पहले की अगर आप ने भी खाई हो मीट भात ... बी ...इयर ... घंटो उनकी तोप छोड़ने वाली कहानी सुनी हो तो आपकी भी जय हो ! तो जनाब आजकल भाई साहेब को बस एक ही शौक है ... मीट बढ़ियाँ होना चाहिए ... राजा बाज़ार वाला ... छोटा पाठा ... पीस बड़ा होना चाहिए ... लकड़ी का इंधन और मिटटी की हांडी ... जगह कोई पांच सितारा ... हल्दी नमक के अलावे भाई साहेब की दिमाग का मसाला ... घी मीट के वजन का ... गोलकी ... जाफर से लेकर हर मसाला कूटकर .... मीट जब चूल्हे पर चढ़ जाए तो उसमे ... हा हा हा ... पानी की जगह बिलकुल खालिस थ्री एक्स ...! इतना कुछ हुआ कि नहीं की भाई साहेब शुरू होते है ... अरे आओ ना इतना बढ़िया व्यवस्था कि ... हाँ उनको भी ले आओ ... बांकी को हम फोन कर देते है ... खालिस मीट .. और ... !



अब शाम हो गयी धीरे दिये मीट के परिंदे जमा होने लगे ... इकठ्ठा होने के लिए जगह तय कर दिया गया ... बच्चो के पार्क के सामने ... लोग जुटे सुमो तैयार ... चल दिए बैठ कर ... रे बाबा ... ऐसा इंतजाम सा ... ऐ सी कमरा ... कमरे में क्वालिटी का शराब ... मोटा गद्दा वाला बेड मामला समझ में नहीं आया ... चल भाई मीत बढ़िया बनाया है ... सलाद के साथ नमकीन भी खालिस पियक्कर वाला ... अब शुरू हुआ दौर ... ना बांकी रहे शाम सिर्फ टकराए जाम ,,, अब शुरू हुआ खेल ... भाई साहेब ने कहा की मेरे एक दोस्त ने इसको ... रेस्ट ... को बनाया है मई जब चाहूं इसका फ्री में इस्तेमाल कर सकता हूँ बांकी गेस्ट भाइयों का बज गया ... अरे सा ... बिना टी आर पी के चैनल और रुवाब त देख तनी... भाई साहेब के गेम का नया सीन आया मीत के साथ एक नए सज्जन ... पत्रकार ... जाम रुका ... भाई साहेब ने सीन दो के मुताबिक एक प्याला नए भाई को थम्हा दिया और ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे का नगमा बिना रेडियो सूना दिया !अंग्रेजी चैनल के तेज़ तर्रार भाई ने जाम खाली किया और मीत भात पर टूट पड़े और उड़न छू ! बच गए कभी नंबर वन के रिपोटर नंबर टू ... मोटा गद्दा देख मन नहीं माना ... आराम फरमा लिए ... रात गहरी हुई तय हुआ चला जाय सज्जन के साथ बैठे गाडी में पूरी बड़ाई ... मीत झा का कोई जोड़ नहीं है ... दोस्तों पर हज़ारों कुर्बान ... रिपोटर साहब ... गदगद ... तभी एक आवाज़ आयी भाई साहेब एक बार तो मेरा नाम लीजिये ...इस पार्टी का टोपी मेरे ही माथे है



मीट झा का मीट पुराण काफी पुराना है यही पुराण सुनकर तो कई लोग घायल हो जाते हैं ! अब देखिये पहाड़ी इलाका ... एक महिला पत्रकार की मौत ... भाई साहेब पहुँच गए देश को बताने की सच क्या है ... होटल लिया पत्रकार की मौत के गम में रम में बना दिया मीट ... होटल के बेयरे से लेकर अंग्रेजी के लास्ट लेटर के रिपोटर ने भी खाए मीट ... अब भाई साहेब मौत पर भी मीट खाकर मातम मनाते हैं !



जय हो

सोमवार

दिले बेरहम पत्रकार पार्ट एक

जय हो




विचित्र शहर के सम्पादक की गाथा लम्बी है और मै यह नहीं चाहता कि आप बोर हो जाएँ सो मैंने अब कहानी का रुख एक ऐसे पत्रकार की तरफ कर रहा हूँ जिसने पत्रकारिता में महिला प्रेमी होने में सम्पादक को पीछे छोड़ दिया है ! यह भी अब सम्पादक की स्थिति में आ गया है पर स्नेहा के सानिध्य में ऐसे डूबा है की इसके अन्दर का मटुक सामने आ गया है ! अब आपको सीधे कहानी पर ले चलते है ... भाई को इन्फेक्सन कब लगा यह तो भाई भी नहीं जानता पर जीविशन रोड में काम करते हुए गिन्जन की आदतों ने इसे भी कामुक बना दिया था ! आपको यहाँ बताते चले की गिन्जन सर भी सम्पादक के बहुत बड़े मुरीद रहे और यही कारण रहा कि सम्पादक ने कई बार इन्हें भी फ्रेशर्स भेज सम्मानित किया है !और बाद के दिनों में विचित्र शहर में जब झाजीवा का चैनल आया तो गन्धर्व प्रेमिका के साथ गिन्जन को भी सम्पादकवा नौकरी देने में सफल रहा !

अब इधर उधर नहीं भटकेंगे ... कहानी बताही देते है ! तो भाई पहले दिल्ली में था और सीधे जिविशन रोड आकर टीवी में गिरा ... नौकरी मिल गयी ... जुगाड़ शुरू ... पहले खबर छापने के लिए पांच सौ रुपया फिक्स किया और बाद में ... समझ ही गए होंगे ! तो भाई को पता चला की बिना गर्दन वाले पत्रकार भाई साहब का समय बदल गया और वे समय को पकड़ लियें है सो समय को पाने के लिए भाई ने काफी मेहनत की नौकरी बिना गर्दन वाले पत्रकार जी ने इनको दे दिया पर शर्त ... जुगाड़ ... समझ गए ना ! और भाई का काम बदल गया पहले जुगाड़ ... इसी दौरान सरकार बदली ... विचित्र शहर की गद्दी जात के ही नेता को मिल गया अब का चाहिए ... चारो जगह लड्डू ... दो हाथ में और दो .... ? भाई का समय बदला ... ऐसा बदला की भाई धराम से गिरा ... सीधे भक्ती चैनल वाले साहब के घर ... मज़ा आगया यहाँ तो बिना गर्दन वाले साहब पत्रकार ही सब थे ... ले फिर जुगाड़ ... ऐसा जुगाड़ की इन्द्र भी परेशान ... अरे सब विचित्रे शहर में मिलेगा कि कुछ उपरो ... कैसे छप्पर फार के दिया है हो ... हई रे बाप ... साथे देखे थे चिड़ियाँ खाना में ... एलानियाँ हो ... विचित्र शहर के विशेष जी तो कई बार मुंह में पानी भर के बोले भी ... पर खिलाड़ी जी तो आना जाना शुरू कर दिया था ... सा ............ बभना हई हो ... ! पर सब हाथ मलते रह गए ... पर भाई ने निष्ठां दिखाई छाप्दिया मालिक से लेकर पूर्वज के नाम पर खुलने वाला चैनल में साथे ... देख पड़ोसन जल मरे तो मर जाओ ! तो खेल कबूल ... कबूल कबूल !

जय हो

मंगलवार

एक शीर्षक दें... पार्ट थ्री

जय हो




वी टी यानी विचित्र शहर के सम्पादक के लिए दुनिया बहुत ही छोटी है ... जैसे ... उसे बड़ा विस्तरा चाहिए ... दोनों ओर... सुरा और सुंदरी ... वह भी सुडौल ... बोतलें भी बड़ी चाहिए बिलकुल ... सामंता की तरह ... यह भी अपना चेहरा बड़ा रखता है ... इदी अमीन की तरह ... यह बिस्तर पर उन फ्रेशर्स से सलूक भी उसी तरह करना चाहता है ... और यह सब वह इसीलिए करना चाहता है ताकि विचित्र शहर में वह अपने आपको शैतान साबित कर सके ! अक्सरहां रात को ओवर कोर्ट और चेहरे पर तिरछी टोपी डाल सिगरेट का कश लगाता हुआ घूमता है ... झूठी कहानी सुनाना शगल है... अपने कुकृत्यों को सुनाने के लिए पार्टियां दिया करता है ... और उस पार्टी में अपने नए कुकर्म का बखान करता है... जैसे उसने एक जंग जीत ली हो ... धंधा और धन्धेवाज़ उसके साथी है ... वो भी इसी तरह की कहानी सुनाकर वेताल पचीसी दिखाते हैं ... यह सब विचित्र शहर के आई टी ओ की पास होता है ... आपको बता दूं इस विचित्र शहर में एक आई टी ओ भी है और इसी आई टी ओ से ब्लोक की तरफ जाने वाली सड़क पर यह वह सब कर चुका है जिसे मानव समाज में हैवानियत कहा जाता है !

बहरहाल अब कहानी ... पार्ट थ्री !



विचित्र शहर ... विचित्र सम्पादक ... विचित्र दुनिया ... दुनिया ऐसी की जिसमे सिर्फ जिस्म और धोखा बिकता है .... खरीददार भी है ... उन खरीदारों में मुंहमांगी कीमत लगाने वाला यह सम्पादक भी है !अचरज की बात है की इस सम्पादक ने आज भी बनियान पहनने की आदत नहीं डाली ... और तो और वह ... वह वो भी नहीं पहनता है ... वजह सबको मालूम है ... दिक्कत नहीं ... आराम से सबकुछ .... आप यह सोच रहें होंगे की मै इतना कैसे जानता हूँ ... तो सच यह है की यह एक कल्पना है ... उस बधस्थल की कल्पना है ... जहाँ से लौटने के लिए अस्मत गवानी पड़ती है ... सिर्फ यह कहानी है ... इस कहानी के पात्रो को पहचानने की कोशिश नहीं होनी चाहिए ! यह निवेदन है पर आपका मन नहीं माने तो किसी भी ऐसे पुरुष को अपने मानस पटल पर लाइए और उसे कहानी का पत्र बना कर पढ़िये और मज़ा लीजिये ... वह मज़ा नहीं जो सम्पादक लेता है ... शर्मिंदगी का मज़ा ... यह तो सिर्फ आइना दिखाने की कोशिश भर है ताकि कोई इस लाइव समाज में ऐसा करने की जुरर्त ना करे !



क्षमा ... कहानी से भटक गया था !मेरा सम्पादक कविताएं भी लिखता है ... दूसरों के चोरी का ... शब्दों का हेरफेर में माहिर है... इस मामले में वह अपने को रोबिन हुड मानता है ... आप पकड़ लिए तो ठीक नहीं तो वाहवाही दीजिये ... तुम्हारे गेसू ... तुम्हारी अचकन ... दो बूंद ... बस इतना ही ! असल में कवि बनाना तो मजबूरी थी इससे फ्रेशर ... जाती है ... ऊपर का असर है ! बात बनती गयी और सम्पादक... का व्यवसाय बढ़ता गया ... कभी मो....तिहारी ... कभी ... रां... ची.... खेल चालु आहे ....!विचित्र न्यूज़ का दफ्तर तो फ्रेशर की कबूतार्वाजी के लिए फेमस हो गया ... दोस्त आते ... पैमाना ... खनकता रहा ! पर बात उस दिन बिगड़ गयी... !



यह फ्रेशर नहीं थी ... यह तो पहले से ही तेज़ थी ... सम्पादक की नब्ज पकड़ चुकी थी ... एंकर आते ही बन गयी ... विचित्र शहर के लोंगो ने विचित्र न्यूज़ में देखा ... क्या बात है हो सम्पादकवा त फिरो ले आयल ... अच्छा त अबकी इहे इनकर सब खेल बिगाड़ी .... जाय द ... छुछुन्नर बा ...!सचमुच खेल की शुरुवात हो गयी थी ! न्यूज़ पढ़ाने से पहले सम्पादक के चैंबर .... चैंबर अन्दर से बंद ... घंटो बाद निकलती तो सम्पादक के चेहरे पर तेज़ ... आखों में नशा ... एंकर भी मस्त ! सम्पादक ज़िन्दगी को बूंद बूंद जी रहा था ... और एंकर ... उसके तिजोरी से बूंद बूंद निकाल रही थी ... दोनों खुश ... पर जल रहा था कहीं ... किसी के सिने में ... वह कोई एंकर का प्रेमी नहीं ... वह तो सम्पादक की गन्धर्व बंधन की स्वामिनी थी ... धधक रहा था उसके कलेजे में ... ! पर सम्पादक तो नयी ज़िन्दगी के रस का आनंद में डूबा हुआ था ... अब किसकी चिंता ... जब तक एंकर है तभी तक ज़िन्दगी का मज़ा है ... पहले प्यार ... अब .... कहीं एंकर छिटक गयी तो ... और एक दिन सम्पादक ने फोन किया .... हेल्यु ... कहाँ हैं आप जी ... आपका तो फोन नहीं आता है तो .... समझ नहीं पाएंगी .... क्या पापा ... अच्छा ... कोई बात नहीं ... कब लेना है स्कूटी ... नहीं जी ... हेल्यु ... मै सुन रहा हूँ ... बाज़ार से क्यों जी ... लोन मै दे दूंगा ... पक्का... बिलीव करियें ... चु चु चु ... मच मच ... हेल्यु ... कल सुबह ही आइये ... छछूंदर की तरह आवाज़ ने वहाँ लोंगो को चौंका दिया ... अरे ...देख त छुछुन्नर कहबा से आगैल ह ... देख रे देख बहते छुछुवा ता.. ! सम्पादक चैंबर से बाहर निकला ... छ्छुन्नर की आवाज़ बंद ... साफे बंद ... नौकर भी समझ गया ... सम्पादकवा आवाज़ निकालत रहे ... रे छोड़ ... कब सुधरी पते नइखे ... जाय दे !

तीखी धुप विचित्र शहर के लोग घरो में दुबके थे और सम्पादक स्कूटी के लिए एंकर को चैंबर में लों दे रहा था ... फ़ाइल पर साइन किया और एवज में तीस हज़ार ... अच्छी कीमत लगाईं सम्पादक ने ... स्कूटी आ गया ... पर स्कूटी की पार्टी ... खेल शुरू ... एंकर गायब ... चौबीस घंटे से गायब ... सम्पादक भी गायब ... स्कूटी भी गायब ... विचित्र न्यूज़ में हडकंप ... माँ पापा दोनों ने विचित्र न्यूज़ के ऑफिस में ... लाओ लाओ मेरी बेटी कहाँ है ... कहाँ है सम्पादकवा ... लों काहे दिया ... स्कूटी काहे दिया ... संपादक बनता है घुसारे देंगे ...! बोलती बंद ... घिघ्घी बंध गयी मातहतो की ... अब का होगा हो ... इ सा ...ऐसा करता है की लगता है हम सब दलाले है का ... ऐ सर ... ठीके बात है ... चुप ... बोलिहो भी मत अभिये बाप महतारी फाड़ देगा ! पर सम्पादक असर विहीन ... रसप्यार में डूबा ...! अगले दिन ... सुबह के दस बजे ... एंकर अस्त व्यस्त विचित्र न्यूज़ के दफ्तर में आती है ... मेकप रूम में घुस जाती है ... फिर निकली चेहरे पर सुकून .. गर्वीला गर्दन तन गया ... मातहतो को देखि मुस्क्रुराई ... स्कूटी से चल दी ... आज भी एंकर आपको स्कूटी से विचित्र न्यूज़ में दिख जायेगी !

जय हो

शनिवार

एक शीर्षक दें - पार्ट टू

जय हो




तमाम बाते ... तमाम आरोप ... बावजूद विचित्र शहर का यह सम्पादक आज भी वही कर रहा है ... वही सोच रहा है ... जिसे सभ्य समाज में गलत माना जाता है ! आज भी उसकी सोच में लडकी ... कामुकता ... शराब ... मोबाइल पर चिकनी चुपड़ी बातें ... ज़िन्दगी का हिस्सा है ! थोडा भी अफ़सोस नहीं कि गांधी के देश में औरत और लडकी सम्मान में सबसे ऊपर हैं ... राह चलती हर औरत इस सम्पादक के जेहन में वेश्या है या बदचलन है जिसे पैसो के बल पर ... धोखे में रख कर ... यह पाना चाहता है ! साफ़ कपड़ो में रहने वाला यह सम्पादक विचित्र शहर के नामी गिरामी के साथ अपनी इज्ज़त बचाने में लगा रहता तो कई बार उनके नाम पर दलाली कर लेता ! गाडी पर प्रेस का मुहर लगा कर चलने वाला यह सम्पादक कितना नापाक है ... उसके इरादे कितने खौफनाक है कि उस विचित्र न्यूज़ में काम करने वाली उन लड़कियों से पूछिए जिसने चप्पल भी इस पर तान लिया था ! अपनी बेटी की उम्र की लड़कियों से इश्क फरमाने वाला यह सम्पादक सच पूछिए तो पत्रकारिता के नाम पर कोढ़ है !



अब कहानी ... बारिश पूरी जवानी पर थी ... रह रह कर मेघ के गर्जन ... और हवाओं की तेज़ लपट से कोई घर से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था ... बावजूद पत्रकारिता के जूनून में वह घर से निकली ... विचित्र न्यूज़ के दफ्तर पहुंची ... सुबह के सात बजे थे ... दरवाजे पर चपरासी खड़ा था .... लडकी पूरी तरह भींग चुकी थी ... हाथ में छाता के बावजूद वारिश के बूंदों ने उसे कहीं नहीं छोड़ा था ... चपरासी ने कहा -बौवा भींग गेलः कोई बात ना उपरे वाला रूम में चल जा पंखा चला के कपड़ा सुखा लिह ... कोई अय्थिन त बता देबूवा...!चपरासी का अपनापन ने भींगी लडकी को रहत दी और वह विचित्र न्यूज़ के पहले तल्ले पर बने एक मात्र कमरे में चली गयी और पंखा चलाकर बैठ गयी !



रह रह कर बादलो की गडगडाहट ... तेज़ धार ... पूरा विचित्र शहर पानी पानी हो गया था... सड़के पानी पानी .... सड़को पर सन्नाटा ... लडकी कमरे में बैठे सोचने लगी ... नहीं आना चाहिए .... इतनी बारिश पता नहीं कोई आयेगा भी नहीं ... शायद न्यूज़ नहीं चलेगा ... फालतू आ गयी ... अच्छा बारिश रुकते ही घर चली जायेगी ! वह उठकर कमरे में टहलने लगी ... शीशा ... खुद को निहारने लगी ... चलो अभी स्ट्रगल का दौर है ... एक दिन ... टीवी पर वह न्यूज़ पढ़ेगी ... पूरा देश उसे पहचानेगा पी एम से सी एम तक ... और तभी सम्पादक की गाडी आकर रुकी ... चपरासी दौड़ा ... जी हजूर आ गेल्थिन ... ! और कौन कौन आया है ... आज न्यूज़ नहीं चलेगा क्या ... सुर्खियाँ के लिए एंकर कौन है .... चपरासी ने कहा जी हजुर , एंकर बौवा त आयल हथिन ... वारिश में भींग गेल्थिन हे बेचारी ... उपरे वाला कमरा में कपड़ा सुख्वीत हथिन ... बुला दियो का हजूर...?



विषैले विषधर की तरह सम्पादक की आँखे चमक गयी ... मन में कामुकता का उन्माद छाने लगा ... उसके अन्दर का राक्षस फुंफकार मारने लगा ... चेहरे की कुटिलता को चपरासी नहीं समझ पाया ...सम्पादक ने चपरासी को सौ रूपये निकाल कर दिए और विचित्र शहर के रेल स्टेशन के पास जाकर मंदिर के पास से फूल लाने को कहा ... चपरासी निकल गया ... मौक़ा ... फिर नहीं मिलेगा ऐसा मौक़ा ... मौक़ा पे मौक़ा ... दबे पाऊँ ... शातिर चीते की तरह झपट्टा मारने ... सीधे ऊपर पहुँच गया ... अरे राम ... लडकी अकेली ... सम्पादक ने बिना कुछ कहे उसे अपने आगोश में लेने की कोशिश की लडकी सन्न रह गयी ... जोरदार ... पूरी ताकत से दे दिया एक तमाचा ... सटाक की आवाज़ गूंज गयी ...! न्यूज़ कैंसिल ... सम्पादक ने ... चेहरे को सहलाते कहा - मै तो दोस्ती करना चाहता था ... तुम गलत समझ गयी ... लडकी रणचंडी बन गयी ... दांत पिसते बोली ... दोस्त अपनी बेटी को बनाओ ... उस दिन और आज का दिन ... आज भी कसक है सम्पादक के सीने में... वो मेरी नहीं हो पायी... कई बार उस लडकी को फोन भी किया पर मामला फिट नहीं बैठा ... लडकी खुद्दार थी ... और आज भी है !



यह सिर्फ एक घटना नहीं ... एक कल्पना है सम्पादक के करतूतों का ... वह क्या कर सकता है उसकी एक बानगी है ! मानस पटल पर सम्पादक को लेकर जितनी दरिंदगी हो सकती है ... वो कर सकता है आज सोच रहा हूँ ... उसके चेहरे पर ... कुटिलता के साथ मासूमियत ... सम्पादक ... कामुकता में अँधा हो जाता था ... उस दिन तो उसने हद कर दी ... विचित्र शहर के सबसे फेमस गर्ल्स कालेज की पत्रकारिता की छात्रा का जन्म दिन मनाया और फिर छी छी ...! कभी कोई अपराध बोध नहीं ... एक नहीं कई कहानियां ... अब तो शर्म भी उसको आती नहीं ... विचित्र शहर का यह सम्पादक ... आज भी इसी फिराक में रहता है... और उसे इस अपराध में सहयोग काल भैरब भी करते है ... !



अगले अंक में पढ़ियेगा ... स्कूटी ... लोन ... और निशा







जय हो



शुक्रवार

सब देखते ही रह गए और ...?

जय हो



इसे कहते हैं दोस्ती ... ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे ... भले ही दलम के दलपति के साथ धोखाधड़ी हो जाय ... है ना इसे कहते हैं जान से ज्यादा प्यारी दोस्ती ... इसीलिए जब राजगीर में राजा घोड़ा युक्त तांगा से चल रहा था तो बॉस ठुमुक ठुमुक कर राजा के साथ राजधानी से राजगीर तक का यात्रा वृत्तांत सूना रहा था ... राजा ने कहा की... आप जैसा कोई मेरे ज़िन्दगी मी आये तो बात बन जाय ... बॉस की ठुमकती चाल पर उसके साथी मन ही मन जल रहे थे .... सा ...... अभीतक आदत नहीं गयी है ... दल्ला है सा... ! खबर दलपति के पुरानी हवेली भी पहुँच गयी कि तालीमास्टर फुदक रहा है ... राजा के साथ उनकी गाडी में राजगीर की यात्रा कर लिया है ... दलम के दलपति की टिपण्णी ... पिता पर पूत .... ? अब यकीन ना करके हो ... एक दमे सा... खतमे बा... जाय द... अब आई नु त कुकुरवा नाहित दौरा दिहे स ! लैकियों सबके भेजे ला कारे ... ओकरा नाहित का नाम रहे रे ... उ भडुवा के ... आज कल कहाँ बा एक दिन दिल्ली में घरवा पर आयल रहे ... ओकरे नाहित इहो ... का रे उ कहाँ बा ... ओकर गोतिबा ... घुसे मत दिहे ...




दरअसल बॉस को पाला बदलना जरुरी हो गया था ... दलाली बंद ... अधिकारी डर से किसी का भी फ़ाइल बढ़ाने से पहले जांच लेता था .. पत्रकार का नहीं हैं ना ... दलालवा का है का ... जाय दो यार उपरे से मना हो गया है !काम बंद .. राजा के घर जाने वाला कैमरा बंद ... विज्ञापन बंद ... रेस्टुरेंट वाला विज्ञापन से कितना दिन .. उहो विज्ञापन के बदले खाना फ्री ... जात जमात के दरवारी भी बात बंद कर दिए ... दिन खराब हो गया ... रात से नींद गायब ... राजा के घर की चाय ... बिस्किट ... ना अब नहीं आ सीधे पहुँच गए राजा के सामने ... तेरे घर के सामने एक घर बनाउंगा.. राजा मुस्कुराए ... दाहिने ... बांयें हथेली को मिलाये ... अरे नाराज़ कब थे उ तो आप ही इधर उधर कर रहे थे ... ! राजा भी भारी खिलाड़ी ... राजा भी इतने दिनों के अन्दर पुरानी हवेली के अन्दर खानों में क्या हो रहा है कि जानकारी चाह रहा था ... टार्गेट सामने आ गया ... बजा दिया !

तो अब बॉस को गौर से देखिये ... शाम को राजा के घर से निकलते ही फुदकने लगता है .... राजा की निकलेगी बारात नशीली होगी रात ...! जय हो

गुरुवार

एक शीर्षक दें

यह सिर्फ एक कहानी है ... इसके कोई पात्र आपके ज़िन्दगी में दिख जायं तो उन पर ऊँगली उठाने की जरुरत नहीं है बस उनको देखिये और मुस्कुरा दीजिये ... बस इतना ही... उन्हें पहचानने की कोशिश उनकी जिंदगी को तबाह कर सकती है ... आप सिर्फ कहानी पढ़िये और मज़ा लीजिये ... वैसे एक बात बता दूं की यह सिर्फ एक कहानी है ... कल्पना पर आधारित ... सच से कोई सामना नहीं ! तो शुरू करता हूँ एक विचित्र शहर की कहानी ...


इस शहर में सब कुछ है बिलकुल दुसरे शहरो की तरह ... गांधी के नाम पर मैदान है ... एक नदी है जिसे इस शहर के लोग गंगा के नाम से जानते है और यहाँ भी यह नदी शहर के बाहर बहती है
यहाँ भी एक गोल घर है ... एक चिड़ियाँ खाना है ... अखवारों के दफ्तर है ... टीवी चैनल्स के भी ऑफिस है ... जब यह सब है तो लोकल चैनल भी हैं और तभी यह कहानी है ! लोकल चैनल ने टीवी में नौकरी पाने के लिए फ्रेशर लड़कियों के सपने को गहरा कर दिया ... सपने को सच करने का दावा करने वाले लोकल चैनल के बॉस के चैंबर में बेड बिछवा दिया ! हाय रे शहर ... विचित्र शहर के कामुक और दिल फेंक सम्पादक की तो चांदी ... हरेक दिन चादर से लेकर सब बदलने की तैयारी ... भलमचस प्रोडक्शन के बैनर तले ... सबसे पहला ... सबसे आगे ... विचित्र न्यूज़ ... देखना ना भूलें .... चेंबर में बोतल ... खनका ग्लास.. चूडियो की चनक ने बहार ला दिया वीटी ने बिना बनियान के शर्ट को खूंटी पे टांगी और ....
अगले दिन विचित्र चैनल के ऑफिस का नज़ारा बदल गया ... मैडम ... मैडम अब बॉस हो गयी ... कुछ भी करना है मैडम से पूछो ... मैडम भी खुश ... रातो रात मैडम का हुलिया बदल गया ... जींस टॉप ... कभी कभी तो इतना छोटा की अन्दर की बात भी सामने आ जय !

सम्पादक ने नया तरीका अब अपना लिया खुद तो चैंबर में बैठता रहा और काम सिखने आने वालियों को विचित्र न्यूज़ के दफ्तर में ... मौक़ा मिला की वालिओ की ट्रेनिग शुरू ... कपडे ऐसे नहीं ऐसे पहनना चाहिए ... ये तुम्हारे टॉप ठीक नहीं है ... खुद को एक्सपोज करो लोग देखे तो देखते रह जाय ... उफ़ क्या क्या नहीं कहता और धीरे धीरे उनके कपड़ो पर सम्पादक की हाथ ... बुरा मत सोचो .. यह तो तुम्हारी भलाई के लिए कर रहा हूँ ... मेरे पास आज ही विचित्र राज्य के बड़े चैनल के बड़े अधिकारी का फोन आया था ... सब बात हो गयी है ... तुम्हारी नौकरी पक्की ... इधर आओ ... हाथ देखे ... लकीरे काफी गहरी है बहुत ऊपर जाओगी ... !

सांझ ढलने वाली थी और सम्पादक उस दिन खुद ही चैंबर से निकल कर न्यूज़ के दफ्तर में आ गया ... फलां कहाँ है ... चपरासी ने सलाम बजाय और कहा मैडम त उपरे हथी ... मेकप करेला गेल्थिन हे ... संपादक चुचाप ऊपर पहुँच गया ... टूटे शीशे में खुद को निहार रही उस बाला को उसने पत्रकार बना दिया ... पत्रकार बन जब वह नीचे आयी और न्यूज़ पढ़ने के लिए कैमरे के सामने गयी तो बरबस कैमरामैन ने पूछ लिया तबियत ठीक नहीं है क्या ... कोई बात नहीं सम्पादक सर को खबर करते है अपनी गाड़ी से घर छोड़ देंगे ... न्यूज़ के बाद सम्पादक आनन् फानन में स्टूडियो पहुंचा कंधे पर हाथ रखा ... हौले हौले गाडी तक ले गया और गाडी चल पड़ी ... विचित्र शहर की सडको पर दौर पड़ी गाडी ... गाडी में वादे .. कसमे ... और गले में सोने की चेन डालकर गन्धर्व बंधन में उसे ले लिया गया ... तबियत विश्वास के आगे ठीक हो गयी और विचित्र देश में यह सब ... किसी को पता नहीं चला


विचित्र देश के इस शहर में बड़े पत्रकार जब भी आते सम्पादक तीन तेरह कर अपने चेंबर में लाने में सफल हो जाता ... फिर यह चेंबर मयखाना बन जाता ... धुएं और शराब की गंध की खुशबू ऐसी बिखरती की गेस्ट चारोखाने चित्त... शुरुर चढ़ता और सम्पादक डाला की भूमिका में आ जाता ... क्या चाहिए ... अरे नया है ... अभी तो पत्रकार बनाया है ... अपने यहाँ दिल्ली ले जाइए ... जबतक मन करे रखिये और फिर मेरे पास वापस .... ठीक उसी समय मोबाइल की घंटी सम्पादक की बज उठी .... हेल्यु ... अरे तुन .... चूम चूम .. मच मच ... मै तुम्हारे बारे में सोच रहा था सुनो अभी निकल सकती हो सिंह जी है दिल्ली के कौन नहीं जानता ... पी एम भी बुलाते है ... ब्लाक चौराहे पर होटल में आ जाओ ... रूम नंबर ... 0000 समझ गयी ना .. अभी इंटरविउ होगा ... और दल्ल्ला की भूमिका से सम्पादक भडुवा बन जाता !कितनो की सेज सजाई ... कितनो का अबोर्सन कराया ... पर आज भी सम्पादक वैसे ही है


अब विचित्र शहर में एक और चीज है ... यहाँ खेल के लिए स्टेडियम है और वहां एक मोहल्ला भी है ... लड़की दिल्ली ... चारमिनार घूम कर छुट्टियों में आयी ... संपादक ने लड़की को दोस्त से मिलाने स्टेडियम इलाके में लाया .. दोस्त को बहार निगरानी में रख्खा ... और उसे मां बना दिया ! फिर अबोर्सन ... अबोर्सन ... उफ़ विचित्र शहर में ये क्या हो रहा है ... सम्पादक ... खुश है की उसने ... कमीना गिरी की हद पार कर लिया है !

सम्पादक सम्पादक था अब उसके मातहत समझ गए ... लडकी आये ... सम्पादक ने बुला लिया ... मातहत ने लड़की को काम से निकाल दिया ... लडकी काम करती रही पर सम्पादक ने पैसे इस लिए नहीं दिया की यह सेज पर बिछने को तैयार नहीं थी ... सम्पादक आज भी है ... उसका चेहरा देखिये ... बेशर्मी झलकती है ... भडुवा गिरी टपकता है .. आज भी विचित्र देश में यह ज़िंदा है पूछना है तो शमशान में जाकर उनसे पूछिए जो इसके चक्क्कर में आकर अपनी जान से हाथ धो बैठी ... मुझे लगता है इससे अधिक लिखने पर लडकियों की पहचान हो जायेगी ... इतना तक में लडकियों की आत्मा को शांति मिलेगी !


जय हो

बुधवार

बाप के नौकर

जय हो




आज हम आपको जो भी खबर देंगे उसमे किसी का नाम नहीं लेंगे ना ही चैनल का ही नाम लेंगे ! पहचान आपको करनी है कि ताकि आपकी मिमोरी दुरुस्त रहे ! हाँ पटना के नाला रोड में एक ही परिवार में तीन की हत्या की खबर मिलते ही रिपोटर कैमरा मैन, कैमरा और माइक आई डी को लेकर नाला रोड पहुंचा ! यहाँ यह बता दे कि किसी जमाने में यह रिपोटर भागड़ यादव का खुफिया था ... इलाका इससे डरता था ... फिर इसने रिपोटरी करनी शुरू कर दी ताकि पुलिस से बच जाएँ ! हुआ भी वही ... पत्रकार बनते ही सिपाही से दरोगा तक सलाम करने लगे सलाम ख़ुफ़िया जी ... सलाम ! घर तक हिस्सा पहुँचने लगा... घर वाले खुश... शादी किया तो साले को ड्राइवर बना लिया ... यह है रिपोटरी की कमाई !



हाँ तो आपको बता रहा था ... भाई रिपोटर पहले पहुँच गया ... कैमरा शूट करने लगा ... यह अभी पीटीसी करने वाला ही था कि चैनल का अपराध देखने वाला बदना मुहल्ले में रहने वाला रिपोटर वहाँ टपक गया और पहले रिपोटर से माइक मागा ... लह इ का ... तोरे बाप के नौकर बानी का ... कैमरा माइक ले के हम आइल बानी आन पीटीसी तूं करबे ... निकल निकल ... ना त इहे माइक .... घुसा देंगे ... ! घटना कवर करने गए दुसरे रिपोटर भी सकदम्म... अरे इ का हुआ !



खैर मामला इतने से ही नहीं ख़त्म हुआ ... भाई बदना मुहल्ला वाले रिपोटर ने ना आऊ देखा ना ताऊ आ सीधे आर्यन में जा गिरा ... भाई साहब नौकरी दे दो ... और लिस्ट में पहले नंबर पर नाम आया और ... नौकरी पक्की ! सबसे बड़ी बात यह कि दोनों ही एक ही इलाके और भाषा भाषाई है


जय हो

रविवार

दलाल नहीं दल्ला से बचे महुआ के लोग

जय हो महुआ टीवी के बिहार के ब्यूरो चीफ ओम प्रकाश को महुआ प्रबंधन ने चैनल से निकाल दिया है ! ओम प्रकाश महुआ के पटना ब्यूरो के लौन्चिंग से यहाँ काम देख रहे थे ! पर जिस तरह से ओम प्रकाश को चैनल से निकाला गया है उससे साफ़ है कि दाल में कहीं ना कहीं काला है ... वो भी ऐसा वैसा काला नहीं ... समझिये की पीला दाले काला हो गया ! अब सवाल उठता है कि ऐसा क्या हुआ कि सब काला हो गया ... दिल्ली में बैठे ओम जी के सर्व दुःख नाशक भी कुछ नहीं कर सके और ओम जी की विजली गुल हो गयी ! तो भाई साहब जुबान और .... पर लगाम जरुरी है ! बिना सोचे बोले और ... बिना समझे ...? तो गए ! हाथ से तोता नहीं कबूतरे उड़ ना गया ! लेकिन आखिर महुआ टीवी में ओम जी का जलवा जलेबी की तरह घूम कैसे गया ... साहब तो पहले से ही जलेबी थे इमिरती किसने बना दिया ... लगता है कि गेम मुत्तु भैया ने ही कर दिया ऐसा गेम की ओम क्या मयंक और वीरेंदर भी नहीं समझ पाया ...सब बेचारे .... खाली दाढ़ी बनवाते रह गए ! गोलगपारा में लगने से यही होता है ... कहाँ नहीं रहे ओम भैया ... इ टीवी ... वोइस ऑफ़ इंडिया .. महुआ टीवी ... और मयंक महुआ का पटना ब्यूरो हेड बनकर आगे था पर पद नहीं मिला ... तिवारी जी का टीक घूमा कैसे ... है ना सवाल

साब देखते ही रह गए ... और खेक्ल होकर रह गया ... मुत्तु भैया भी फाढ़ बान्ह लिहिन थे कि चुनाव में लाखो कमाएंगे ... नहीं मानेगा तो ऐसे मारेंगे की चारो खाने चित्त ! धोबिया पछाड़ नहीं गदह पछाड़ .... सब्बे समझ जायेंगे ... रुकिए ना ... खेल की शुरुवात तो अब होगी ... अबतक तो लौंग खाते थे ... अब ... दिखाना परेगा
कौनो बात नहीं है ओम भाई ... काजल की कोठरी में सब काले हैं ... सब ... चिंता नहीं करना है ... चिंता मत करिए .... जान गए ना मुत्तु भैया और उनके सहयोगी को अरे वही आज स्वतन्त्रता दिवस पर पार्टी चल रही है ... अब ... समर शेष ... उनकी चिता जलाने की तैयारी कीजिये .... पैरवी हुई ना खिलाफ ... कौनो बात नहीं ... धुर बकलेले है का जो मिश्र जी के साथ कन्धा में कन्धा मिला के रो रहे है ... धुर आप भी दिखा दीजिये ... एगो चैनले ले आइये ... सब सलाम करेंगे ... वो भी .. चुनाव है ना ! लेकिन खबरदार ... उ बाला बात किये तो ... सब नाशे हो जाएगा ,,, समझे ना ? ना समझे तो अनाडी है आप बड़े खिलाड़ी है ! लेकिन खामोश मत होइए पी पी पाण्डे के पास जाइए ... उसके पास दाल से लेकर बीबी के सेंत का भी हिसाब है वही कैद है मुत्तु भैया की जान ... पी पी पांडे को देख कर हिलने लगते है मुत्तु भैया ... पापी के पाप ... कहा जाएगा अरे जब उनका नहीं हुआ तो ... याद हैं ना झाजिवा को ठेंगा दिखाकर निकल गया ... भाई बोला माँ बीमार है ... भाई बोला भाभी बीमार है ... खुद बोला बीबी बीमार है ... ठगकर भागा तो मिश्रा जी के पास .. आप उनके कंधे पर सर ... ना ना ना ...! दलाल से बचने की जरुरत नहीं ... तीस लाख नहीं ... तीस करोड़ ... कौन बोला ... बोला कौन ... बिहारी मालकिन वाले चैनल का रिपोटर ... दलाल नहीं दल्ल्ला से बचिये! जय हो

ओम प्रकाश तड़ीपार

जय हो




महुआ टीवी के बिहार के ब्यूरो चीफ ओम प्रकाश को महुआ प्रबंधन ने चैनल से निकाल दिया है ! ओम प्रकाश महुआ के पटना ब्यूरो के लौन्चिंग से यहाँ काम देख रहे थे ! पर जिस तरह से ओम प्रकाश को चैनल से निकाला गया है उससे साफ़ है कि दाल में कहीं ना कहीं काला है ... वो भी ऐसा वैसा काला नहीं ... समझिये की पिला दाले काला हो गया ! अब सवाल उठता है कि ऐसा क्या हुआ कि सब काला हो गया ... दिल्ली में बैठे ओम जी के सर्व दुःख नाशक भी कुछ नहीं कर सके और ओम जी की विजली गुल हो गयी ! तो भाई साहब जुबान और .... पर लगाम जरुरी है ! बिना सोचे बोले और ... बिना समझे ...? तो गए ! हाथ से तोता नहीं कबूतरे उड़ ना गया ! लेकिन आखिर महुआ टीवी में ओम जी जलवा जलेबी की तरह घूम कैसे गया ... साहब तो पहले से ही जलेबी थे इमिरती किसने बना दिया ... और लगता है मुत्तु भैया की औकात भी ढीली पद गयी है बेचारे बचा भी नहीं सके .... खाली दाढ़ी बनवाते रह गए ! गोलगपारा में लगने से यही होता है ... कहाँ नहीं रहे ओम भैया ... इ टीवी ... वोइस ऑफ़ इंडिया .. महुआ टीवी ... पर तिवारी जी का टीक घूमा कैसे ... है ना सवाल


ओम भैया भी फाढ़ बान्ह लिहिन है ... ऐसे मारेंगे की चारो खाने चित्त ! धोबिया पछाड़ नहीं गदह पछाड़ .... सब्बे समझ जायेंगे ... रुकिए ना ... खेल की शुरुवात तो अब होगी ... अबतक तो लौंग खाते थे ... अब ... दिखाना परेगा




कौनो बात नहीं है ओम भाई ... काजल की कोठरी में सब काले हैं ... सब ... चिंता नहीं करना है ... चिंता मत करिए .... उनकी चिता जलाने की तैयारी कीजिये .... पैरवी हुई ना खिलाफ ... कौनो बात नहीं ... धुर बकलेले है का जो मिश्र जी के साथ कन्धा में कन्धा मिला के रो रहे है ... धुर आप भी दिखा दीजिये ... एगो चैनले ले आइये ... सब मादा करेंगे ... वो भी .. चुनाव है ना !

लेकिन खबरदार ... उ बाला बात किये तो ... सब नाशे हो जाएगा ,,, समझे ना ?



ना समझे तो अनाडी है आप बड़े खिलाड़ी है !

जय हो

गुरुवार

परचम लहरायेंगे नवेंदु

जय हो




आखिर नवेंदु ने अपना लक्ष्य पा ही लिया ! इसे कहते हैं लगन ! मन में ठान लिए कि हर हालत ... मौसम ... कैसा भी हो...घुसना है मौर्या टीवी में... और नवेंदु घुस गए ! बन गए मौर्या टीवी के खेवनहार ! नवेंदु को पहले ही मौर्या टीवी में जाना चाहिए था ... जाते भी पर ऐसा ना पोल्टिक्स कर दिया कि नहीं घुस पाए थे ! अच्छा कोई बात नहीं ... घुस गए हैं तो पैर भी पसारेंगे ... और बैठियो जायेंगे ही ! बड़े जुगारु टाइप है नवेंदु ... ऐसे वैसे थोड़े ही बैठेंगे ... बैठेंगे ही नहीं धंस जायेगे कि कोई उठा ही नहीं पाए ... इसीलिए सर के चेहरे पर चिंता की लकीर ... पांडेवा.. की भी ... वाली है ... सारा ज्ञान गुड गोबर कर देंगे ...
बड़ा छांटते रहते थे कि ... इ जानते ही नहीं है कि किदवई पूरी से कृष्णापूरी तक एक सड़क नहीं आती है और जिस रास्ते से चलकर आये हैं ... गुड गोबर कर दिए ... हट बकलोल


हाँ तो सायबान ... अब मौर्या टीवी पर गायन होगा ... विरहा ... चैती ... सोहर से लेकर विदाई तक के गीत वो भी बिलकुल ठेठ अंदाज में ... खासकर इस ख़ुशी में तो...रात ही हो गया ... झाजीवा का चैनल जाय तेल लेने ... पाहिले जमकर सोहर ...


बेचारा अग्रवाल भी निजात पाया ... जब ना तब ... ऐ सर सोहर सुन लीजिये ... आआअ रे रे रे .. जब से ललनवा ... आआआ रे ...
पक गया था कान .. ऐसा खखोड़ पार्टी कहीं नहीं देखे होंगे ...
वैसे एम कुमार जी आपको चिंता करने जरुरत नहीं ... इ पूरा बाल मूंछ रंगते है ... सफ़ेद नहीं दिखता है ... !

चलिए नवेंदु जी का पुनर्वास हो गया झाजीवा ने जस ले लिया ... समय से खराब हुआ समय अब ठीक हुआ है ... ऐसे ही होता है ... अब तो पढ़ाने का अनुभव भी आ गया है ... रात में काम ना करने वाले के लिए जोखिम बनकर ज्वाइन कर लिए ... एम कुमार ने परिचय कराया .. इ हैं ... विद्वान् पत्रकार ... अब आपलोंगों के बीच ... राजनीति देखेंगे ...ले बलैया .. जानते है सब का समझा .. दिन भर .. कैटरीना को ही देखेंगे ... धत !

तो बंधू .... सब खुश है ... सब झाजीवा ... अपना आदमी आ गया है ... इ कहियो केकरो हैं का कि पेट ठोक रहे है... अरे भाई इहो बीच में छेद वाला सीडी हैं ...


जय हो

बुधवार

बिहार में लॉन्च होगा एक और नया चैनल इंडिया लाइव

जय हो




बिहार से एक और नया चैनल लाने की तैयारी लगभग पूरी हो गयी है ! इंडिया लाइव नामके इस चैनल को कोलकाता के एक बड़े बिजनेस ग्रुप ला रहा है ! इस खबर से झाजी के चैनल के पत्रकार और गैर पत्रकार को ठंडी सांस लेनी चाहिए क्योंकि यह बिजनेस मैन पहले मौर्या टीवी खरीदने की

कोशिश किया था ! इस बिजनेस ग्रुप के लोंगो ने आकर झाजी के चैनल का मुआयना भी किया था और चैनल की कीमत जितनी लगाई उससे झाजी और उनका सुनील अग्रवाल बिदक गया !पता ही नहीं था की कौड़ियों के मोल बताएगा !

पर यह सच है कि झाजी और उनके नए पुराने साथी जो दावा करे पर इस चैनल की कीमत आज की तारीख में दो अंको में भी नहीं है ! अब इन बातो को छोड़ा जाय ... तो बंधू बिजनेस मैन और उसके साथी ने इंडिया लाइव को बिहार से लांच करने का फैसला किया है और बिहार विधान सभा चुनाव के पहले यह दिखाई देने लगेगा ! अब इस चैनल के हेड के तौर पर बिहारी मूल के एक पुराने पत्रकार जो इन दिनों नेशनल चैनल में बिहार देखते है को लाने की तैयारी चल रही है पर इस पर अभी फैसला नहीं हो पाया है !

हालांकि आर्यन टीवी से पहले इस चैनल को लांच करने के लिए काम कर रहे टीवी पत्रकार को मुहमांगी कीमत पर ज्वाइन करने की भी तैयारी है तो टेक्नीकल स्टाफ कोलकाता के ही एक चैनल से लाने की योजना फाइनल हो गया है !

अब सोंचे झाजी कि पहले से ही विज्ञापन नहीं मिला और अब दूगो और आ रहा है ... नाशे करेगा का !



जय हो

मंगलवार

विजुअल चोर स्ट्रिंगर

जय हो
पहले चैनल वाले या फिर उनके ब्यूरो चीफ ही विजुअल की चोरी करते थे पर आजकल विजुअल चोर स्ट्रिंगर का चलन बढ़ गया है ! अभी तीन दिन पहले की एक खबर को लेकर बिहार के बेगुसराय के साधना चैनल के रिपोटर ने जिला के ही एक नेशनल चैनल के स्ट्रिंगर पर अदालत में विजुअल चोरी का मामला दर्ज करने का फैसला किया है !
मामला यह है कि पांच अगस्त को बेगुसराय में एक महिला की मौत सांप के काटने से हो गयी ! महिला के परिजनों ने डाक्टर के यहाँ ले जाने की वजाय ओझा गुनी का सहारा लिया ! मृत शरीर को डंडे और थाली लगाकर उसे जीवित करने में जुटे रहे ! इस पुरे वाकये को साधना के जिला रिपोटर प्रभाकर कुमार ने शूट कर लिया और छह अगस्त को यह खबर साधना ने दाब कर चलाया ! बस क्या था नेशनल चैनल ने अपने जिला रिपोटर से विजुअल की मांग की ! यहीं आतें हैं विजुअल चोर स्ट्रिंगर संतोष कुमार ! इस स्ट्रिंगर ने प्रभाकर कुमार के विजुअल चुरा कर इंडिया टीवी , स्टार न्यूज़ और एनडीटीवी को भेजा ! इंडिया टीवी ने विजुअल को ब्रेकिंग न्यूज़ करके खूब चलाया और अपने पटना के रिपोटर नितीश चन्द्र को विजुअल के लिए धन्यवाद दिया ! लेकिन अब साधना न्यूज़ ने प्रभाकर कुमार को आदेश दिया है कि वे सारे उन चैनलों पर मामला दर्ज कराएं जिन पर यह खबर विजुअल चुरा कर दिखाया गया है !
अब प्रभाकर कुमार ने बेगुसराय कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाने का फैसला किया है ताकि चोर को चोर कहा जा सके |

जय हो

शनिवार

सस्ती कीमत महंगे पत्रकार

जय हो

इस खबर को जानने के बाद पत्रकारों के ऊपर से आपका विश्वास टूट जाएगा...  उनकी खबर पर आप कभी यकीन नहीं करेंगे...   ये पत्रकार खुद अपनी कीमत कैसे लगाते हैं ... यह जानकार आप पत्रकारों को किस नज़र से देखेंगे ? चलिए आपको लाल बुझ्क्कर के चक्कर से मुक्ति देते हुए सीधे खबर पे आते हैं | जेडीयू को छोड़कर पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह लालू यादव की पार्टी में शामिल होने के लिए छपरा में एक बड़ा जलसा का आयोजन किया और इस जलसे को न्यूज़ चैनलों पर दिखाने के लिए कई लोगो को जात के पत्रकारों को जमात बनाने का फरमान जारी हो गया ! पटना के पत्रकारों को इसके कवरेज के लिए मोटी रकम के पैकेट पहुंचाए गए ... साड़ी सुविधा छपरा में देने के लिए वादे हुए हैं ! मोटी रकम( एक लाख )  सिर्फ उन्ही चैनलों के दफ्तर के बॉस तक पहुँचाया गया है जिनके पास ओवी वैन की सुविधा है ! विना ओ वी वैन वाले चैनलों के लिए वहाँ आनेपर पचास हज़ार देने का वादा किया गया है !

अब आप पूछेंगे कि भाई पत्रकारिता को कोठे पर बिठाने वालो की पहचान क्या है ... गौर कीजिये ... खुद पहचान लीजिये .. सिर्फ हिंट दे रहा हूँ ... सफाई कोई नहीं दे सकता ... जो पटना का पत्रकार इसके कवरेज के लिए छपरा गया हो ... ओवी वैन ले गया हो ... खबर नहीं चली हो ... बिना ओवी  वाले का जाना ... अखबार के पटना पटना में रहने वाला  ब्यूरो चीफ सावन में गया तो मांसाहारी ...| वैसे लोकल न्यूज़ वाले रिपोटर की वजाय खुद वहाँ हो तो मामला साफ़ है ! वैसे लालू यादव के पैसे पर जीने वाले पत्रकार तो वैसे भी जाएगा ... भले शर्म को छुपाने के लिए काला चश्मा पहन ले ... लालू के खाने के बाद उसका खाना खाय ... ऐसे की पहचान तो पहले से है पर इस बार पहचान के लिए नितीश कुमार ने भी गेम में हिस्सा लिया है ! अपने सारे कारिंदे को ... चमचा पत्रकार को उस गुट में शामिल कर दिया है ताकि पल पल की खबर सीधे उन तक दिल्ली में पहुंचे !
खेल खिलाड़ी का ... पर खेल रहे है नितीश कुमार , लालू यादव ... और लाखो खर्च किया है प्रभुनाथ सिंह .. पैसा डकारा है जात के जमीनी नेता ने .. जिसके देह से दलाली की बू आती है |

जय हो