बुधवार

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मंगलवार

अच्छा हुआ रुक गया एअरपोर्ट का तमाशा

जय हो
आपको बता दूं कि पटना के मीडिया वालो का खेल बिगड़ गया है ! रोज़ एयर पोर्ट पर नेताओं की पिछलग्गू बनने की प्रवृति पर सरकार ने रोक लगा दिया है ! अब कहाँ करेंगे ये मिडिया वाले चमचागिरी इसकी सोच में पड़ गए हैं ! सच जानिये तो एअरपोर्ट पर रिपोर्टिंग कम और नज़र मिलान का कार्यक्रम जोड़ पकड़ लिया था !अब इतनी नीचे की सोच वाले हैं पटना के टीवी वाले यह यहाँ काम करने आने वाली लडकियां नहीं समझ पायीं थी ! एअरपोर्ट पर लडकी देखी की जीभ से सिसकियाँ निकालने का दौरा आ जाता था ! क्या नया क्या पुराना ! सब के सब की आँखें तन जाती और आँखों से ही सब करने के लिए किनारा करते इन पत्रकारों को देखते तो आपको शर्म आ जाती पर ये तो निर्लज्जता से बखान करते कि उसकी .... तो देखो ... उ भी देखो ... क्या मस्त है ... तबतक नए लडको में से कोई मोबाइल भी लगा देता ... हेल्यु ... वहाँ क्या कर रही हो ... इधर तो आओ ... ल और खेल शुरू !
छुटभैया नेता भी इस खेल में रस तलाशने लग गया और खबर देने के बहाने मोबाइल नंबर मांग आया और उनको दे दिया जो भेड़ की खाल में भेडियें हैं ... जीह से लाड टपकाते नंबर पाते ही जुगाड़ में लग जाते कि टाइम मिले तो बात तो शुरू कर लूं ! और यह सब सुबह सबेरे ही होने लगता ! और उस दिन तो गजब हो गया ... नज़र मिलाने के चक्कर में पत्रकार नेता को ही भूल गए ! कोई सवाल पूछने वाला नहीं ... नेता खड़े रह गए माइक लगा रह गया और पत्रकार गायब !
खबर सरकार से लेकर एअरपोर्ट अथोरिटी तक गयी और तय हुआ कि सुरक्षा के नाम पर इन पत्रकारों को एअरपोर्ट रिपोर्टिंग बंद करा दिया जाय और जनाब एअरपोर्ट अब सिर्फ नेताओं के लिए .... आपको जाना है तो क्षेत्र में जाइए ! मिला ना मज़ा ! जय हो

शनिवार

टीवी वालो प्लीज़ अब मत डराओ


जय हो 
आपको पहले ही चेता रहा हूँ ... सम्हल कर टीवी देखिये ... आगे पीछे के चक्कर में ये टीवी वाले हमें एकबार फिर भूत प्रेत ... सांप बिच्छु से भयभीत कराने के खेल रच रहे है ... आपको याद दिला दूं के दो दिन पहले देश के नंबर वन का दावा करने वाले आजतक ने दो घंटो तक ऐसे डराया कि कईयों ने तो टीवी बंद कर लिया वहीँ अपने को स्टार कहने वाले ग्रुप का खेल देखिये कि ये तो भूत पर उतार गया !अब इस खेल का हम कर रहें है खुलासा कि आखिर ये टीवी वाले का सांप बिच्छू और भूत प्रेम क्यों जाग गया है !
अयोध्या फैसले के दिन आजतक चैनल के हिस्से आई बंपर टीआरपी से फूलकर कुप्पा हुई आजतक की टीम ने यह प्रोमोशन शुरू किया कि –“ख़बर मतलब आजतक30 सितम्बर को अयोध्या पर आया फ़ैसला और उस दिन आजतक को सबसे ज़्यादा लोंगो ने देखा। उससे कहीं पीछे स्टार न्यूज़ और इंडिया टीवी क्रमशः दूसरे और तीसरे नंबर पर आए। आजतक की टीआरपी ने उस दिन इतनी उछाल भरी कि पुरे हफ्ते का ग्राफ़ केवल एक दिन में   ऊपर उछल आया।आजतक वालो ने फिर दावे करने शुरू किया कि आगे भी ख़बरे ही दिखाएगा। कम से कम आजतक के धांसू प्रोमोशन से तो ऐसा ही लग रहा था।
अभी दो ही दिन हुए थे कि एकाएक आजतक के एडिटोरियल टीम को अक़ल (?) आई और सोचा कि एक दिन के भरोसे तो गाड़ी को स्पीड मिल गई.. लेकिन अयोध्या बार-बार आने से रहा। कोर्ट के फ़ैसले के बाद दो-तीन दिन खींचतानकर अयोध्या पर ही चैनल ने बहस दिखाई थी। लेकिन लोगों की रुचि कहां अयोध्या पर टिकी रहनी थी सो टीम के सामने चुनौती थी कि टीआरपी ऊंची कैसे  बनी रहे। वरना फिर लेने के देने पड़ जाएंगे। और एक शॉर्टकट फ़ार्म्यूलाखोजने के पीछे अपने सैकड़ों रिपोर्टर को लगा दिया | पर यह भी सोचना आजतक के नकवी के लिए भारी पर गया कि पुराने मॉडल के रिपोटर  रूपी तोप के भरोसे टीआरपी ऊंची बनाए रखनी मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। लिहाज़ा तय हुआ कि सभी भूत-प्रेत-नाग-नागिन और चुड़ैले एक साथ बाहर निकाल ली जाएँ। जिन हथियारों के दम पर इंडिया टीवी ने टीआरपी के किले में सेंध लगाकर अगड़े चैनलों में घमासान मचाया था। वही हथियार अब आजतक ने हथिया लिए |

कम से कम इन तस्वीरों से तो दर्शकों को यह तय करना है कि ख़बर का मतलब आजतक होता है या आजतक माने अंधविश्वास। गुरूवार (7 अक्टूबर) को चैनल ने प्राइम टाइम में लगातार डेढ़ घंटे तक सांप-संपेरों का खेल खेला। हरियाणा के हिसार गांव के एक ऐसे व्यक्ति को स्टोरी बनाया गया जिस पर यह पागलपन सवार था कि सांप उसे काटने आते हैं। चैनल ने स्टूडियो में पंडित-मनोवैज्ञानिक और डॉक्टर तक बुलाए । पीपली लाइव के मानिंद सांप-सपेरा लाइव बिठाए गए। उधर गांव में रिपोर्टर ने पहुंचकर पूरा मजमा सजाया और चौपाल भी बैठी। कल तक जो खबर मतलब आजतक बताया जा रहा था। वहां सांप महाराज संपेरे की पुंगी पर नाच रहे थे। सांप एक विक्षिप्त देहाती को डस रहा था तो चैनल के एंकर स्टूडियो में बैठे विशेषज्ञों को डस रहे थे। वे सब मिलकर हम दर्शकों को डसते रहे। अयोध्या के बाद आजतक के लिए यह राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका था। 

एक वक़्त था जब इंडिया टीवी के माथे यह ठीकरा फोड़ा जाता था कि रजत शर्मा का यह चैनल केवल नाग-नागिन, एलियन्स और भूतप्रेत के दम पर टीआरपी बंटोरता है। पर इंडिया टीवी के शुरमाओ ने अपनी बीमारी आजतक को ट्रांसफर कर दिया । उधर, इंडिया टीवी तो फटाफट खबरों में मस्त है। दो साल हुए इस चैनल में अब ना तो कोई भूत आता है और ना ही नाग। अलबत्ता अपमार्केट भूत और एलियन्स स्टार न्यूज़ पर इन दिनों जमकर दर्शन दे रहे हैं। 

तो  भाइयो टीवी के भूत को झारू से झाड कर ठीक करने का माद्दा आपही दर्शको के पास है ! तो एक बार झाड दीजिये और फिर कहिये ...


जय हो





शुक्रवार

घुंघरू के बोल

जय हो
बॉस आजकल मुश्किल में आ गए हैं !करना कुछ चाहते है पर हो कुछ और जाता है ! अब देखिये ना राजा ने पत्रकारों को बुलवाया और चुनाव प्रचार के अपने फैसले को बताना शुरू किया ! राजा की खूबी है आते ही पारखी निगाह चारो तरफ ... बॉस पर भी नज़र गयी ... बॉस मुस्कुरा दिया ... पर राजा की आँखों को बॉस के कुटिल मुस्कान के भीतर का फरेब दिख गया बस राजा ने तय कर लिया... बजाउंगा ... ऐसा बजाउंगा की बजना छोड़ देगा !हुआ भी वही !
राजा ने सवाल जवाब का दौर शुरू किया ... राजा का उत्तर एक बार जा रहा हूँ तो पहले चरण का प्रचार करिए को आउंगा ... जी ... जी ...जी एक सवाल है ... बॉस की आवाज़ गूंजती रही और राजा ने इग्नोर कर दिया ... एक सवाल है ... राजा जी ... पुराने दलपति ने कहा है कि मेरे पैरों में घुंघरू बन्हा दे तो फिर मेरी चाल देख ले ... राजा कि नज़रे ... तिरछी नज़रे उठी निशाने पर बॉस ... राजा कि आवाज़ या उत्तर ... तो आप नाच लीजिये ... ठहाका गुंजा ... राजा मुस्कुराए ... कैसा बजा बॉस ... अच्छा लगा ना
जय हो

गुरुवार

साइज़ क्या है

जय हो
जब आप शर्मिंदगी को भूल जाएँ और निर्लज्जता पर उतर आयें तो आप कुछ भी कर सकते हैं ... कुछ भी ... भले ही यह आपको शोभा दे या नहीं ! आप पत्रकार हैं इसका मतलब ... दलाल नहीं ना ... कि मान बैठे अपने को भडूवा... ! आप चैनल के मालिक हो सकते हैं ... पत्रकारिता के शिखर पर जाएँ ... पर यह नहीं करें ... !

आज की दौर में कोई भी मीडिया की पढ़ाई करता या करती है तो उसके सामने एक सपना होता है ... अखवार में छपने या फिर टीवी पर दिखने का ! लेकिन आप जैसे लोग जब उससे साइज़ और सोते हुए कपडे का कलर पूछेंगे तो क्या बीतेगी उस पर इसका अंदाजा है ! गलतियां एक बार होती है तो उसे माफ़ किया जाता है पर बार बार होने पर बलंडर कहा जाता है ... बाज़ार में पता कर के देखिये क्या इमेज बन गया है ... दलाली तक तो ठीक है पर दूसरों के लिए दल्ला बनाना ठीक नहीं है !
जय हो